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चार वर्षों में लगभग 6,303 हेक्टेयर रिज क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक देशी पौधों का किया जाएगा रोपण

नई दिल्ली: दिल्ली की पर्यावरणीय सुरक्षा, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था और आधुनिक सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति प्रदान करते हुए मंगलवार को माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत राजधानी में 70 लाख पौधारोपण महाअभियान का शुभारंभ किया। गृह मंत्री ने राष्ट्रपति अंगरक्षक परिसर स्थित […]

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  • July 7, 2026 4:46 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: दिल्ली की पर्यावरणीय सुरक्षा, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था और आधुनिक सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति प्रदान करते हुए मंगलवार को माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत राजधानी में 70 लाख पौधारोपण महाअभियान का शुभारंभ किया। गृह मंत्री ने राष्ट्रपति अंगरक्षक परिसर स्थित सेंट्रल रिज और नानकपुरा रिज में वृक्षारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने आर. के. पुरम स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित मुख्य समारोह में ‘मिशन 70 लाख पौधारोपण अभियान’ और दिल्ली रिज ईको रेस्टोरेशन कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया।

इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली के उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह, श्री आशीष सूद, सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, डॉ. पंकज कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। राजधानी में स्वच्छ परिवहन, व्यापक हरित क्षेत्र, आधुनिक आधारभूत संरचना और वैज्ञानिक पर्यावरण प्रबंधन को समान प्राथमिकता दी जा रही है। आज जिन परियोजनाओं का शुभारंभ एवं लोकार्पण हुआ है, वे केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि विकसित, स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर दिल्ली के भविष्य की मजबूत नींव हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दिए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और मिशन लाइफ (Mission LiFE) ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। दिल्ली सरकार उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से जुड़ा जन अभियान बना रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस वर्ष के बजट में 22,236 करोड़ रुपये के ग्रीन बजट का प्रावधान कर पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, वन विकास एवं हरित अवसंरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार, रिज क्षेत्रों का संरक्षण, देशी प्रजातियों का वैज्ञानिक रोपण, वायु गुणवत्ता में सुधार, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का उनके निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था से लेकर पर्यावरण संरक्षण, यमुना के पुनर्जीवन, सार्वजनिक परिवहन और आधुनिक अवसंरचना के विकास तक, केंद्र सरकार का सहयोग दिल्ली को नई दिशा प्रदान कर रहा है। दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल आज की आवश्यकताओं को पूरा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी राजधानी का निर्माण करना है, जहां स्वच्छ हवा, हरित क्षेत्र, सुरक्षित परिवहन, आधुनिक नागरिक सुविधाएं और सतत विकास एक साथ आगे बढ़ें। उन्होंने सभी दिल्लीवासियों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानते हुए कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं तथा उसका संरक्षण भी करें।

70 लाख पौधारोपण से ग्रीन दिल्ली का संकल्प होगा साकार

दिल्ली सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए ‘मिशन 70 लाख पौधारोपण अभियान’ का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक पौधे के संरक्षण, निगरानी और उसके वृक्ष बनने तक की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस अभियान के माध्यम से राजधानी में पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बनाया जाएगा, जिसमें स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), स्वयंसेवी संगठन, धार्मिक संस्थाएं, औद्योगिक प्रतिष्ठान, सरकारी विभाग, सुरक्षा बल और आम नागरिक सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। इसके साथ ही 12 लाख से अधिक पौधों का निःशुल्क वितरण भी किया जाएगा ताकि प्रत्येक परिवार पर्यावरण संरक्षण से सीधे जुड़ सके।

इस अभियान के तहत दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना नहीं, बल्कि राजधानी की पारिस्थितिकी को वैज्ञानिक आधार पर पुनर्जीवित करना है। आने वाले चार वर्षों में लगभग 6,303 हेक्टेयर रिज क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक देशी पौधों का रोपण किया जाएगा, जिनमें लगभग 35 लाख से अधिक देशी वृक्ष और 65 लाख से अधिक झाड़ियां, बांस एवं बेल आदि शामिल होंगी। यह किसी भी महानगर में संचालित होने वाले सबसे बड़े वैज्ञानिक पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन अभियानों में से एक होगा।

 

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लगभग 1,490 हेक्टेयर क्षेत्र में 28 लाख से अधिक पौधे, झाड़ियां और बांस लगाए जा रहे हैं, जिनके लिए सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां, कार्यादेश और स्थल तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी कर ली गई हैं। इस अभियान में सामान्य वृक्षारोपण के स्थान पर वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा रही है, जिसके अंतर्गत तीन-स्तरीय वन संरचना विकसित की जाएगी। इसमें पीपल, बरगद, गूलर और पिलखन जैसे की-स्टोन प्रजाति के वृक्ष, नीम, अर्जुन, जामुन, शीशम और ढाक जैसे मध्य स्तरीय देशी वृक्ष और स्थानीय झाड़ियां एवं बांस लगाए जाएंगे, जिससे जैव विविधता, कार्बन अवशोषण तथा प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिलेगा।

दिल्ली सरकार ने रिज क्षेत्रों को स्थायी संरक्षण प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। लगभग तीन दशक से लंबित प्रक्रिया को गति देते हुए लगभग 4,850 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को रिजर्व फॉरेस्ट के रूप में अधिसूचित किया जा चुका है। शेष पात्र क्षेत्रों की अधिसूचना की प्रक्रिया भी तेज गति से जारी है। इससे राजधानी के ‘ग्रीन लंग्स’ कहे जाने वाले रिज क्षेत्र को सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा तथा अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और पर्यावरणीय क्षरण पर प्रभावी रोक लगेगी। पहली बार दिल्ली के वनों के लिए फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट द्वारा वैज्ञानिक वर्किंग प्लान तैयार किया गया है, जिसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया है। इसी प्रकार असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य की संशोधित प्रबंधन योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

पंचवटी वन, ऋषि वन,नक्षत्र वन आदि बनेंगे

रिज क्षेत्रों में आठ नए जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भूजल पुनर्भरण, मिट्टी की नमी और वनस्पतियों के दीर्घकालिक संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नागरिकों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरणीय शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पंचवटी वन, नक्षत्र वन, बेल वन, ऋतु वन, ऋषि वन, तीर्थंकर वन, वामन वृक्ष वन और कुरानी वाटिका सहित आठ थीम आधारित वनों का विकास किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग करते हुए प्रत्येक पौधे की जियो टैगिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और नियमित फील्ड निरीक्षण किया जाएगा ताकि लगाए गए पौधों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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