जोधपुर: राज्य उपभोक्ता आयोग ने साइबर फ्रॉड से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की निगरानी याचिका को खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी फर्म या व्यक्ति के बैंक खाते में साइबर फ्रॉड की संदिग्ध राशि आने पर पूरे खाते को सीज या फ्रीज करना पूरी तरह से गलत है। बैंक केवल उतनी ही राशि को होल्ड पर रख सकता है, जितनी विवादित है।
राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा और सदस्य लियाकत अली की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि पूरे बैंक खाते के लेन-देन पर रोक लगाना उपभोक्ता हित और न्याय के विरुद्ध है।
बाड़मेर की कृषि उपज मंडी स्थित एसबीआई शाखा में ‘श्रीकार्ट ई-कॉमर्स’ फर्म का खाता है, जिसके प्रोपराइटर गणपतसिंह और जोगाराम हैं। वर्ष 2025 में इस फर्म के खाते में साइबर फ्रॉड से संबंधित 1,05,898 रुपये की राशि जमा हुई थी। साइबर क्राइम पुलिस से सूचना मिलने पर बैंक ने एहतियात बरतते हुए फर्म का पूरा खाता ही फ्रीज कर दिया था, जिससे उनके सामान्य व्यापारिक लेन-देन ठप हो गए।
इसके खिलाफ फर्म ने बाड़मेर के जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर खाता डी-फ्रीज करने की गुहार लगाई थी। जिला आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि केवल विवादित राशि को छोड़कर शेष खाते से लेन-देन की अनुमति दी जानी चाहिए। इसी आदेश के खिलाफ एसबीआई ने राज्य उपभोक्ता आयोग में निगरानी याचिका दायर की थी, जिसे आयोग ने अब खारिज कर दिया है।
आंशिक रोक का नियम: यदि किसी खाते में धोखाधड़ी या विवादित पैसे आते हैं, तो बैंक केवल उस विशिष्ट राशि को ब्लॉक कर सकता है।
व्यापारिक सुरक्षा: पूरे खाते को फ्रीज करने से निर्दोष व्यापारियों और फर्मों का दैनिक कामकाज बाधित होता है, जिसे कानूनी रूप से अनुचित माना गया है।