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सड़े आमों से बन रहा था मैंगो जूस! FSSAI की बड़ी कार्रवाई

मेहसाणा (गुजरात): बाहर मिलने वाले मैंगो जूस और मैंगो शेक को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वीडियो में कथित तौर पर सड़े-गले आमों से मैंगो पल्प और जूस तैयार किए जाने का दावा किया गया था। वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा […]

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  • July 13, 2026 7:00 pm IST, Published 2 hours ago

मेहसाणा (गुजरात): बाहर मिलने वाले मैंगो जूस और मैंगो शेक को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वीडियो में कथित तौर पर सड़े-गले आमों से मैंगो पल्प और जूस तैयार किए जाने का दावा किया गया था। वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने तत्काल संज्ञान लेते हुए गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में सड़े हुए आम, दूषित मैंगो पल्प और अन्य खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट कर दी।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मेहसाणा स्थित ‘साकार डेयरी प्रोडक्ट’ नामक फैक्ट्री में की गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में फैक्ट्री के अंदर बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में कर्मचारियों द्वारा सड़े हुए आमों की सफाई और उनसे पल्प तैयार करने का दृश्य दिखाई दिया था। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।

FSSAI की टीम ने मौके पर पहुंचकर फैक्ट्री का निरीक्षण किया। जांच के दौरान परिसर में सफाई व्यवस्था बेहद खराब पाई गई। कई स्थानों पर सड़े हुए आम खुले में रखे हुए थे और उनसे दुर्गंध आ रही थी। इसके अलावा उत्पादन क्षेत्र में स्वच्छता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों ने जांच के दौरान करीब 990 किलोग्राम सड़े हुए आम और दूषित मैंगो पल्प जब्त किया, जिसे बाद में नियमानुसार पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।

स्वच्छता मानकों की खुली अनदेखी

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि उत्पादन क्षेत्र में साफ-सफाई की गंभीर कमी थी। कई कर्मचारी बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों जैसे दस्ताने, हेयर कैप और मास्क के कार्य कर रहे थे। खाद्य सामग्री खुले में रखी हुई थी और कई जगहों पर गंदगी का अंबार दिखाई दिया। ऐसे वातावरण में तैयार खाद्य उत्पाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

FSSAI अधिकारियों ने फैक्ट्री प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही फैक्ट्री से खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया की भूमिका बनी अहम

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वायरल वीडियो के कारण मामला तेजी से प्रशासन के संज्ञान में आया और खाद्य सुरक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि यदि किसी खाद्य उत्पाद या प्रतिष्ठान में अनियमितता दिखाई देती है और उसका प्रमाण सार्वजनिक होता है, तो संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करने के लिए बाध्य होती हैं।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि होने तक लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए। इस मामले में विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की गई, जिससे वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियों को गंभीरता से लिया गया।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

विशेषज्ञों के अनुसार सड़े हुए फलों से तैयार खाद्य पदार्थों का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, संक्रमण और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यदि लंबे समय तक दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाए तो यह शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इसलिए हमेशा प्रमाणित और विश्वसनीय ब्रांड के उत्पादों का ही उपयोग करना चाहिए।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सावधानियां

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सड़क किनारे या अज्ञात स्रोत से मिलने वाले जूस और पल्प का सेवन करने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी उत्पाद का रंग, गंध या स्वाद असामान्य लगे तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए। पैक्ड उत्पाद खरीदते समय निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और FSSAI लाइसेंस नंबर अवश्य जांचना चाहिए।

FSSAI ने दिए सख्त संकेत

खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमित निरीक्षण जारी रहेगा। विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।

जांच जारी

फिलहाल जब्त किए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच जारी है। रिपोर्ट के आधार पर फैक्ट्री के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित संचालकों पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन अथवा अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और सख्त निगरानी कितनी आवश्यक है। उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहकर केवल विश्वसनीय स्रोतों से खाद्य पदार्थ खरीदने चाहिए ताकि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचा जा सके।

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