नई दिल्ली: भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए पहले वनडे मुकाबले में स्टार ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने न सिर्फ मैच का रुख बदल दिया बल्कि उन्हें भारतीय क्रिकेट के चुनिंदा दिग्गज खिलाड़ियों की सूची में भी शामिल कर दिया। बल्ले और गेंद दोनों से शानदार योगदान देते हुए अक्षर ने नाबाद 57 रन बनाए और साथ ही 4 महत्वपूर्ण विकेट भी हासिल किए। उनके इस दमदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत भारत को मुकाबले में बड़ी बढ़त मिली और क्रिकेट जगत में उनकी खूब चर्चा हो रही है।
मैच के दौरान जब भारतीय टीम को मध्यक्रम में संभलकर खेलने की जरूरत थी, तब अक्षर पटेल की नाबाद अर्धशतकीय पारी ने टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। बल्लेबाजी में कमाल दिखाने के बाद अक्षर ने गेंदबाजी में भी इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने नियमित अंतराल पर विकेट चटकाते हुए विपक्षी टीम की रनगति पर अंकुश लगाया। चार विकेट लेकर उन्होंने इंग्लैंड की बल्लेबाजी इकाई को बड़ा नुकसान पहुंचाया और भारत की जीत की राह आसान कर दी।
अक्षर पटेल का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वह एक वनडे मैच में 50 से अधिक रन बनाने और चार या उससे अधिक विकेट लेने वाले भारत के केवल छठे खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के कुछ महान ऑलराउंडरों और दिग्गज खिलाड़ियों के नाम दर्ज थी। इस सूची में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, कृष्णमाचारी श्रीकांत, युवराज सिंह और हार्दिक पांड्या जैसे बड़े नाम शामिल हैं। अब अक्षर पटेल ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से इस विशिष्ट क्लब में जगह बना ली है।
इतना ही नहीं, इंग्लैंड के खिलाफ यह प्रदर्शन उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आया। अक्षर अब उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट, टी20 और वनडे—तीनों प्रारूपों में प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार जीता है। ऐसा करने वाले वह भारत के चौथे खिलाड़ी बने हैं। यह उपलब्धि उनकी बहुमुखी प्रतिभा और विभिन्न परिस्थितियों में टीम के लिए योगदान देने की क्षमता को दर्शाती है।
पिछले कुछ वर्षों में अक्षर पटेल ने खुद को भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडरों में स्थापित किया है। चाहे बल्लेबाजी में संकटमोचक की भूमिका निभानी हो या गेंदबाजी से मैच का रुख बदलना हो, उन्होंने कई मौकों पर टीम को महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाई हैं। यही वजह है कि सीमित ओवरों के क्रिकेट के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट में भी उनकी उपयोगिता लगातार बढ़ी है। अक्षर की सबसे बड़ी ताकत उनकी निरंतरता है। वह टीम की जरूरत के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं और दबाव की परिस्थितियों में भी शांत रहते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में उनका प्रदर्शन इसी क्षमता का एक और उदाहरण माना जा रहा है।