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SIR में नाम कटने से नहीं जाएगी नागरिकता, सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्पष्ट जवाब

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े विवाद पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता और मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं होने या SIR प्रक्रिया के दौरान सूची से हट जाने मात्र से उसकी […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • July 17, 2026 1:31 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े विवाद पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता और मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं होने या SIR प्रक्रिया के दौरान सूची से हट जाने मात्र से उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं होती। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि नागरिकता तय करना निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग की भूमिका मतदाता सूची के निर्माण, संशोधन और पर्यवेक्षण तक सीमित है। यदि किसी मामले में नागरिकता को लेकर प्रश्न उत्पन्न होता है, तो उसका अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी और कानून के अनुसार ही होगा। चुनाव आयोग स्वयं किसी व्यक्ति की नागरिकता घोषित या समाप्त नहीं कर सकता।

पीठ में शामिल न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस विषय पर अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि यदि किसी ट्रिब्यूनल द्वारा किसी व्यक्ति का नाम SIR सूची में शामिल नहीं किए जाने का निर्णय लिया जाता है, तो केवल उसी आधार पर नागरिकता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ऐसे मामलों में आवश्यक प्रक्रिया के तहत संबंधित मंत्रालय या सक्षम प्राधिकरण को मामला भेजा जाएगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उस याचिका पर विचार करने की भी सहमति जताई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद कई लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), अन्नपूर्णा योजना और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि SIR प्रक्रिया से जुड़े अपीलीय ट्रिब्यूनलों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। उनका कहना था कि लंबित मामलों के कारण प्रभावित लोगों को सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ट्रिब्यूनलों के आदेश सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके।

सुनवाई के दौरान यह भी तर्क रखा गया कि जिन लोगों के पास वैध भारतीय पासपोर्ट जैसे दस्तावेज हैं, उनके मामलों में दस्तावेजों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। हालांकि इस मुद्दे पर अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की और कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि मतदाता सूची और नागरिकता दो अलग-अलग कानूनी विषय हैं।

किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटना स्वतः उसकी नागरिकता समाप्त होने का आधार नहीं बनता। नागरिकता से जुड़े मामलों का फैसला संबंधित कानूनों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी, जहां अदालत सरकारी योजनाओं से कथित वंचित किए जाने और SIR प्रक्रिया से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से विचार करेगी।

 

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