नई दिल्ली: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है। सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) की अब तक की जांच का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी कर मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक आस्था से जुड़े संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी धार्मिक संस्थान के चढ़ावे या वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनकी निष्पक्ष और प्रभावी जांच होना जरूरी है।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे के रखरखाव और प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसे पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ की गई, साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने SIT से पूछा है कि जांच किस चरण में है, अब तक क्या कार्रवाई हुई है और किन तथ्यों का सत्यापन किया जा चुका है। अदालत ने जांच की प्रगति और आगे की कार्ययोजना से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी ने कुछ पहलुओं की पड़ताल पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है।
इसके अलावा अदालत ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी कर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है। ट्रस्ट के जवाब और SIT की रिपोर्ट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में यह तय करेगा कि जांच को लेकर आगे क्या दिशा-निर्देश दिए जाएं।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े किसी भी विवाद को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस मामले में सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं।