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राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई

ट्रस्ट से मांगा जवाब; SIT पेश करेगी स्टेटस रिपोर्ट नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट  (20 जुलाई) सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत की सूची के अनुसार, मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची […]

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  • July 19, 2026 7:06 am IST, Published 13 hours ago

ट्रस्ट से मांगा जवाब; SIT पेश करेगी स्टेटस रिपोर्ट

नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट  (20 जुलाई) सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत की सूची के अनुसार, मामले से जुड़ी चार अलग-अलग याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी।

इससे पहले 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।

निर्मोही अखाड़े ने उठाए कई सवाल

मामले के प्रमुख पक्षकार निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन करने की मांग की है। अखाड़े का कहना है कि मौजूदा ट्रस्ट का स्वरूप एक निजी (प्राइवेट) ट्रस्ट जैसा है, जबकि इसे सार्वजनिक (पब्लिक) ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

याचिका में ट्रस्ट द्वारा अब तक किए गए चढ़ावे, दान और संपत्तियों से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। अखाड़े का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए।

मूल रामलला की मूर्तियां स्थापित करने की मांग

निर्मोही अखाड़े ने यह भी मांग की है कि 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को कुर्क की गई रामलला की मूल मूर्तियों को दोबारा गर्भगृह में स्थापित किया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि ट्रस्ट को मूल मूर्तियों को बदलने या हटाने का कानूनी अधिकार नहीं था।

पूजा-पद्धति को लेकर भी उठे सवाल

याचिका में कहा गया है कि राम मंदिर में पूजा, सेवा, भोग और धार्मिक अनुष्ठान केवल रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं और निर्मोही अखाड़े की परंपरागत व्यवस्था के अनुसार होने चाहिए। इसके साथ ही ट्रस्ट के कार्यों की निगरानी के लिए संतों की भागीदारी वाली स्वतंत्र समिति गठित करने और यह जांच कराने की भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का पूरी तरह पालन हुआ है या नहीं।

आज की सुनवाई पर रहेगी नजर

अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में SIT की स्टेटस रिपोर्ट, ट्रस्ट का जवाब और याचिकाकर्ताओं की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। यह मामला राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन, वित्तीय पारदर्शिता और धार्मिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर चर्चा में है।

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