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CJP पर नई मुसीबत! संस्थापक के पिता की संपत्ति जांच की मांग

सूरत। गुजरात के सूरत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सामाजिक संगठन कॉन्फ्रेंस ऑफ जस्टिस पीपुल (CJP) और उससे जुड़े लोगों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आर्थिक स्थिति और संपत्ति की औपचारिक जांच कराने की मांग […]

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  • August 3, 2026 8:10 pm IST, Published 2 hours ago

सूरत। गुजरात के सूरत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सामाजिक संगठन कॉन्फ्रेंस ऑफ जस्टिस पीपुल (CJP) और उससे जुड़े लोगों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आर्थिक स्थिति और संपत्ति की औपचारिक जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने संगठन की कानूनी स्थिति और राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए कथित एक करोड़ रुपये के फंड पर टैक्स देनदारी का मुद्दा भी उठाया है।

अमित तिवारी का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले में अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, यदि किसी सरकारी कर्मचारी की आय सीमित रही है तो उसके परिवार द्वारा विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च कैसे वहन किया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार से भी कार्रवाई की मांग की है।

तीन अलग-अलग संस्थाओं में शिकायत दर्ज

आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी के अनुसार उन्होंने इस मामले को लेकर तीन अलग-अलग स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराई हैं। पहली शिकायत भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में की गई है, जिसमें CJP की कानूनी स्थिति और उसके संचालन से जुड़े पहलुओं की जांच की मांग की गई है।

दूसरी शिकायत सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) को भेजी गई है। इसमें उन्होंने राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP को दिए गए कथित एक करोड़ रुपये के फंड पर जीएसटी से जुड़े नियमों की समीक्षा किए जाने की मांग की है।

तीसरी शिकायत महाराष्ट्र सरकार को भेजी गई है, जिसमें भगवानराव दीपके की आय, संपत्ति और वित्तीय स्थिति की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

क्या हैं अमित तिवारी के आरोप?

अमित तिवारी का दावा है कि भगवानराव दीपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। उनका कहना है कि यदि उस समय उनकी मासिक आय लगभग 60 से 65 हजार रुपये के बीच थी, तो उनके परिवार द्वारा अमेरिका में उच्च शिक्षा पर होने वाला खर्च किस प्रकार वहन किया गया, इसकी जांच होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की गई है तो संबंधित कानूनों के तहत उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच से तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

कपिल सिब्बल के फंड पर भी उठाए सवाल

आरटीआई एक्टिविस्ट ने दावा किया कि उन्होंने कपिल सिब्बल द्वारा CJP को दिए गए कथित एक करोड़ रुपये के फंड को लेकर भी संबंधित विभागों से शिकायत की है। उनका कहना है कि इस फंड पर लागू कर नियमों की समीक्षा की जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की कर देनदारी बनती है तो उसके अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस विषय को लेकर सीबीआईसी से संपर्क किया है और संबंधित प्रावधानों के तहत मामले की जांच की मांग की है।

CJP की कानूनी स्थिति पर भी सवाल

अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में CJP की कानूनी स्थिति को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि संगठन की पंजीकरण प्रक्रिया, उसकी गतिविधियों और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच की जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी कार्य संबंधित नियमों और कानूनों के अनुरूप किए गए हैं या नहीं।

उन्होंने निर्वाचन आयोग से भी इस संबंध में आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा करने और आवश्यक होने पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

महाराष्ट्र सरकार से जांच की मांग

तिवारी का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार को सौंपी गई शिकायत में भगवानराव दीपके की सेवा अवधि, आय, संपत्ति और वित्तीय स्रोतों की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है। उनका दावा है कि यदि आय और संपत्ति के बीच असामान्य अंतर पाया जाता है तो संबंधित एजेंसियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है तथा सभी पक्षों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

फिलहाल यह पूरा मामला शिकायतों और आरोपों के स्तर पर है। संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से इन शिकायतों पर किसी अंतिम निष्कर्ष या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी प्रकार CJP, अभिजीत दीपके, भगवानराव दीपके या कपिल सिब्बल की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी और महाराष्ट्र सरकार इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं। यदि जांच शुरू होती है तो यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं यदि संबंधित पक्ष अपनी प्रतिक्रिया जारी करते हैं तो पूरे विवाद की नई तस्वीर सामने आ सकती है।

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