नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान करने वाले विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। भारत भी उन देशों में शामिल है, जिनके निर्यात पर इस प्रावधान का असर पड़ सकता है। हालांकि, यह टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। विधेयक को अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलना बाकी है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने चेतावनी दी है कि यदि यह कानून लागू होता है और भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत काफी बढ़ सकती है। इससे भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर दबाव पड़ने की आशंका है।
अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़े निर्यात बाजारों में से एक है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ लागू होने पर भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है।
सीनेट ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस की ऊर्जा आय को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार सीनेट में विधेयक को 86-11 वोट से मंजूरी मिली। अब इसे प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा। वहां से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बन सकेगा।
विधेयक में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य रूस के तेल और गैस से होने वाली आय पर दबाव बनाना है।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। इससे भारत को अपेक्षाकृत कम कीमत पर कच्चा तेल उपलब्ध हुआ और घरेलू ईंधन कीमतों तथा महंगाई पर भी दबाव कम रखने में मदद मिली।
GTRI के मुताबिक भारत ने 2026 में रूस से करीब 40.08 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है। रूस से कच्चे तेल की खरीद के मामले में चीन के बाद भारत प्रमुख खरीदारों में शामिल है।
अगर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ भारत पर लागू होता है, तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों की लागत काफी बढ़ सकती है। इसका सीधा असर निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ सकता है।
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि चीन भारत से अधिक रूसी तेल खरीदता है, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था का असर भारत के निर्यात पर भी गंभीर हो सकता है। भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार महत्वपूर्ण होने के कारण टैरिफ बढ़ने से कई क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल इसे भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सीनेट की मंजूरी के बाद विधेयक को प्रतिनिधि सभा और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारत समेत किन देशों पर और किस स्तर का टैरिफ लागू किया जाएगा।