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तीन तमिलों की मौत पर गरमाई राजनीति, उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी

चेन्नई: कर्नाटक के चामराजनगर जिले में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान तीन लोगों की मौत के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ता जा रहा है। मृतकों के तमिलनाडु से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली […]

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  • August 17, 2026 11:40 am IST, Published 4 hours ago

चेन्नई: कर्नाटक के चामराजनगर जिले में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान तीन लोगों की मौत के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ता जा रहा है। मृतकों के तमिलनाडु से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

घटना चामराजनगर जिले के हनूर तालुक में कावेरी वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से जुड़ी बताई जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान तीन कथित शिकारियों की गोली लगने से मौत हुई। विभाग का दावा है कि जंगल में मौजूद लोगों की ओर से पहले गोलीबारी की गई थी। इसके बाद वन अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। इस घटनाक्रम में वन विभाग का एक कर्मचारी भी घायल बताया गया है।

मृतकों की पहचान एंटनी स्वामी, जॉन रोज पीटर और कुमार के रूप में बताई गई है। जब यह जानकारी सामने आई कि तीनों तमिलनाडु से जुड़े थे, तो मामला दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। तमिलनाडु सरकार ने घटना के तथ्यों और वन विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि वन विभाग की ओर से दी जा रही प्रारंभिक सफाई उन्हें स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि मृतकों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।

वहीं, मृतकों के परिवारों ने वन विभाग के दावे पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि तीनों लोग कथित तौर पर अपने मवेशियों की तलाश में जंगल की ओर गए थे। परिवारों ने वन विभाग की गोलीबारी को संदिग्ध बताते हुए इसे कथित फर्जी मुठभेड़ का मामला बताया है। उनका कहना है कि घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।

घटना के दौरान समूह का एक चौथा व्यक्ति मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। वन विभाग का दावा है कि जंगल में मौजूद लोगों के साथ मुठभेड़ जैसी स्थिति बनी थी और इसी दौरान गोलीबारी हुई। हालांकि, मृतकों के परिवार इस दावे को स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका में लापरवाही अथवा गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की बात भी सामने आई है।

इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। बीजेपी ने वन विभाग की कार्रवाई के संबंध में सामने आए दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि घटना की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आनी चाहिए।

घटना ने कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक संवेदनशीलता को भी बढ़ा दिया है। दोनों राज्यों की सीमा से लगे क्षेत्रों में वन, जमीन और आजीविका से जुड़े विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में तीन लोगों की मौत का मामला अब केवल एक वन विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जंगल में वास्तव में घटनाक्रम किस तरह शुरू हुआ और गोलीबारी की परिस्थितियां क्या थीं। मजिस्ट्रियल जांच और प्रस्तावित उच्चस्तरीय जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। जांच के निष्कर्ष यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि वन विभाग की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या उसमें किसी तरह की लापरवाही हुई मृतकों के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है।

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