कोलकाता: सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड अपनी दो बड़ी सहायक कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी के चेयरमैन बी. साईराम के मुताबिक, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की लिस्टिंग मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इन दोनों कंपनियों के आईपीओ की लॉन्चिंग की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
कंपनी प्रबंधन के अनुसार, आईपीओ लाने का फैसला बाजार की स्थिति, निवेशकों की दिलचस्पी और सरकार से मिलने वाले निर्देशों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। ऐसे में दोनों कंपनियों की लिस्टिंग की प्रक्रिया वित्त वर्ष के भीतर पूरी करने की योजना है, लेकिन वास्तविक समय बाजार परिस्थितियों के अनुरूप बदला जा सकता है।
कोल इंडिया के निदेशक मंडल ने मार्च 2026 में SECL और MCL में अपनी 25-25 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से किए जाने की योजना है। इसके तहत नई इक्विटी जारी करने के बजाय मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा सार्वजनिक निवेशकों को बेचता है।
दोनों कंपनियां कोल इंडिया समूह की महत्वपूर्ण इकाइयों में शामिल हैं और देश के कोयला उत्पादन में इनकी अहम भूमिका है। ऐसे में इन कंपनियों की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश और पूंजी बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और उनकी सहायक इकाइयों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की नीति के तहत सरकार समय-समय पर कंपनियों की हिस्सेदारी बाजार में बेचती रही है। इससे सरकारी कंपनियों में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ बाजार से पूंजी जुटाने और कंपनियों के मूल्यांकन को पारदर्शी बनाने में मदद मिलती है।
SECL और MCL की प्रस्तावित लिस्टिंग भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि, आईपीओ का आकार, शेयरों की कीमत और इश्यू से जुटाई जाने वाली संभावित रकम जैसे विवरण अभी सामने नहीं आए हैं। इन बिंदुओं पर आगे चलकर बाजार नियामक की प्रक्रिया और कंपनी की तैयारियों के आधार पर जानकारी जारी की जा सकती है।
कोल इंडिया इससे पहले अपनी कुछ अन्य सहायक कंपनियों को शेयर बाजार तक पहुंचा चुकी है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDI) की लिस्टिंग की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अब SECL और MCL को बाजार में सूचीबद्ध कराने की योजना से कोल इंडिया समूह की और कंपनियों के लिए सार्वजनिक निवेशकों की भागीदारी का रास्ता खुल सकता है। SECL और MCL की प्रस्तावित लिस्टिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों कंपनियां कोल इंडिया के कारोबार में बड़ा योगदान देती हैं। इनके शेयर बाजार में आने से निवेशकों को देश के कोयला क्षेत्र में सीधे निवेश का एक नया विकल्प मिल सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण पहलू आईपीओ का समय होगा। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और सरकारी विनिवेश की प्राथमिकताओं का असर इश्यू की टाइमिंग पर पड़ सकता है। कंपनी ने भी संकेत दिया है कि आईपीओ के लिए सही समय का फैसला बाजार की परिस्थितियों और सरकार के निर्देशों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
यदि दोनों कंपनियों की लिस्टिंग तय योजना के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में होती है, तो यह कोल इंडिया समूह के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट कदम होगा। साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी और मुनाफा कमाने वाली सहायक कंपनियों में निवेश के इच्छुक निवेशकों के लिए भी यह घटनाक्रम अहम रहेगा। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि कोल इंडिया और सरकार दोनों आईपीओ की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं और प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के लिए किस समय को उपयुक्त मानते हैं।
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