नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE ) के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सहयोगी कंपनी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने की तैयारी में हैं। एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी के अनुसार, दोनों कंपनियां मिलकर एनएसई में करीब 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगी।
प्रस्तावित सौदे में SBI की हिस्सेदारी करीब 0.65 प्रतिशत और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की हिस्सेदारी लगभग 0.35 प्रतिशत होगी। इस तरह SBI समूह NSE में कुल करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकता है। यह बिक्री NSE के प्रस्तावित IPO से पहले होने वाली प्रमुख हिस्सेदारी बिक्री में शामिल होगी।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, NSE का IPO करीब 5.26 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्यांकन पर आ सकता है। यदि इसी मूल्यांकन को आधार माना जाए तो NSE की एक प्रतिशत हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 5,260 करोड़ रुपये बैठता है। हालांकि, अंतिम मूल्यांकन और हिस्सेदारी बिक्री से मिलने वाली राशि IPO की कीमत और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
SBI के लिए NSE में हिस्सेदारी की मौजूदा संभावित कीमत खास महत्व रखती है। बैंक ने करीब एक दशक पहले NSE में अपनी 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची थी। उस समय पूरे स्टॉक एक्सचेंज का मूल्यांकन लगभग 18,200 करोड़ रुपये आंका गया था। मौजूदा अनुमानित मूल्यांकन से तुलना करें तो NSE का मूल्य पिछले करीब 10 वर्षों में कई गुना बढ़ चुका है। यदि 5.26 लाख करोड़ रुपये के संभावित मूल्यांकन को आधार बनाया जाए तो NSE की वैल्यू उस समय के मुकाबले करीब 29 गुना अधिक बैठती है। इससे भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और NSE के कारोबार में आई तेज वृद्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है।
NSE भारत के प्रमुख शेयर बाजारों में से एक है और इक्विटी के साथ-साथ डेरिवेटिव कारोबार में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। देश में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ने, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के विस्तार और पूंजी बाजार में बढ़ती गतिविधियों से एक्सचेंज के कारोबार को पिछले वर्षों में मजबूती मिली है।
NSE के IPO को लंबे समय से बाजार की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जा रहा है। एक्सचेंज के सूचीबद्ध होने से निवेशकों को कंपनी में सीधे हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिल सकता है। वहीं, मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर निवेश से निकासी का रास्ता भी मिलेगा।
SBI समूह की हिस्सेदारी बिक्री को इसी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जा रहा है। बैंक और उसकी सहयोगी कंपनी के लिए यह निवेश पर आंशिक मुनाफा हासिल करने का अवसर भी हो सकता है। साथ ही, एनएसई के ऊंचे संभावित मूल्यांकन से पुराने निवेश की बढ़ी हुई कीमत का लाभ उठाने का रास्ता खुलता है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब NSE के आईपीओ की अंतिम संरचना, शेयरों के मूल्य निर्धारण और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर रहेगी। प्रस्तावित मूल्यांकन बाजार में NSE की मजबूत स्थिति को दर्शाता है, लेकिन IPO के समय वास्तविक कीमत और मांग कई कारकों से प्रभावित हो सकती है।
NSE के संभावित IPO का असर व्यापक पूंजी बाजार पर भी पड़ सकता है। स्टॉक एक्सचेंज जैसी महत्वपूर्ण वित्तीय संस्था के सार्वजनिक होने से बाजार में पारदर्शिता और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। इसके अलावा आईपीओ से भारतीय शेयर बाजार में एक बड़े वित्तीय संस्थान की सूचीबद्धता होगी।
SBI और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सौदा NSE के मूल्यांकन में पिछले एक दशक के दौरान आए बड़े बदलाव को सामने लाता है। करीब 18,200 करोड़ रुपये के पुराने मूल्यांकन से बढ़कर अनुमानित 5.26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार की कहानी बताता है।
अब निवेशकों की निगाहें NSE के आईपीओ से जुड़ी अगली घोषणाओं पर रहेंगी। अंतिम कीमत, बिक्री के आकार और IPO की समयसीमा स्पष्ट होने के बाद ही SBI समूह की हिस्सेदारी बिक्री से मिलने वाली वास्तविक रकम का पता चलेगा।