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जियो का डिजिटल विस्तार तेज, यूपी-उत्तराखंड में 7.10 करोड़ मोबाइल ग्राहक

लखनऊ: रिलायंस जियो ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के दूरसंचार बाजार में पिछले एक दशक के दौरान अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। कंपनी के मुताबिक, अगस्त 2016 में शून्य मोबाइल ग्राहक आधार से शुरुआत करने वाला जियो जून 2026 तक इन दोनों सर्विस एरिया में 7.10 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर तक पहुंच गया। इस दौरान कंपनी […]

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  • September 1, 2026 11:22 am IST, Published 34 minutes ago

लखनऊ: रिलायंस जियो ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के दूरसंचार बाजार में पिछले एक दशक के दौरान अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। कंपनी के मुताबिक, अगस्त 2016 में शून्य मोबाइल ग्राहक आधार से शुरुआत करने वाला जियो जून 2026 तक इन दोनों सर्विस एरिया में 7.10 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर तक पहुंच गया। इस दौरान कंपनी ने करीब 6.92 करोड़ नए ग्राहक जोड़े और मोबाइल ग्राहक आधार में लगभग 46.2 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट दर्ज की।

जियो ने सितंबर 2016 में व्यावसायिक सेवाएं शुरू की थीं। लॉन्च के पहले महीने में यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट को मिलाकर कंपनी के करीब 17.4 लाख मोबाइल ग्राहक थे। इसके बाद लगातार विस्तार के साथ ग्राहक संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई। यूपी वेस्ट सर्विस एरिया में उत्तराखंड भी शामिल है। जून 2026 तक दोनों क्षेत्रों में जियो सबसे बड़ा वायरलेस ऑपरेटर बनकर सामने आया है।

दोनों सर्विस एरिया में कुल वायरलेस मोबाइल कनेक्शनों की संख्या जून 2026 तक लगभग 17.85 करोड़ थी। इनमें जियो की हिस्सेदारी करीब 39.8 प्रतिशत रही। कंपनी के अनुसार, यूपी ईस्ट में उसके करीब 4.48 करोड़ और यूपी वेस्ट में उत्तराखंड समेत लगभग 2.62 करोड़ मोबाइल ग्राहक हैं। इस तरह क्षेत्र के मोबाइल बाजार में जियो की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ी है।

मोबाइल सेवाओं के साथ कंपनी ने होम ब्रॉडबैंड कारोबार में भी अपना नेटवर्क विस्तारित किया है। जून 2026 तक यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट को मिलाकर 38 लाख से अधिक घरों और व्यावसायिक परिसरों को जियो फाइबर तथा जियो एयर फाइबर सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। इनमें करीब 19 लाख कनेक्शन यूपी ईस्ट और 19 लाख से अधिक यूपी वेस्ट सर्विस एरिया में हैं। कंपनी के अनुसार, इस क्षेत्र में वह होम ब्रॉडबैंड सेगमेंट में अग्रणी स्थिति में है।

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक नेटवर्क पहुंचाना भी जियो की विस्तार रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। कंपनी ने बांदा, श्रावस्ती, चित्रकूट, सोनभद्र और ओबरा जैसे इलाकों में नेटवर्क क्षमता बढ़ाने के लिए टावर लगाए हैं। इससे ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने में मदद मिली है, जहां पहले डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता सीमित थी।जियो के मुताबिक, देशभर में जून 2026 तक उसके कुल ग्राहक करीब 53.33 करोड़ हो चुके हैं। इनमें लगभग 28.5 करोड़ ग्राहक 5जी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कंपनी का दावा है कि उसके आने के बाद भारत के मोबाइल डेटा बाजार में बड़ा बदलाव आया। सस्ती डेटा दरों और किफायती वॉयस सेवाओं ने इंटरनेट इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया। 2016 में भारत में एक मोबाइल ग्राहक की औसत मासिक डेटा खपत 0.2 जीबी से कम थी। उस समय एक जीबी डेटा की कीमत करीब 228 रुपये बताई गई थी। इसके मुकाबले अब एक जीबी डेटा की औसत कीमत लगभग 7.9 रुपये रह गई है।

यानी एक दशक में डेटा की लागत में करीब 97 प्रतिशत की कमी आई है। इसी अवधि में 4जी और 5जी सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले सक्रिय ग्राहकों की संख्या भी बढ़कर लगभग 93.8 करोड़ हो गई है। जियो नेटवर्क पर औसत ग्राहक हर महीने करीब 43.7 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है। यह आंकड़ा भारतीय उपभोक्ताओं की इंटरनेट पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। वीडियो स्ट्रीमिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शिक्षा और अन्य इंटरनेट आधारित सेवाओं के विस्तार ने डेटा की मांग को और बढ़ाया है।

कंपनी का कहना है कि उसका अगला फोकस तकनीकी क्षमता और नेटवर्क के स्वदेशीकरण पर है। पुराने दौर के दूरसंचार नेटवर्क काफी हद तक विदेशी कंपनियों के हार्डवेयर और प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर पर निर्भर थे। जियो इसके मुकाबले एंड-टू-एंड क्लाउड-नेटिव स्टैंडअलोन 5जी नेटवर्क विकसित करने में निवेश कर रहा है। कंपनी के अनुसार, इस तकनीकी ढांचे का उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप नेटवर्क तैयार करना और भविष्य की डिजिटल जरूरतों को पूरा करना है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जियो की एक दशक की यात्रा इस बात का संकेत देती है कि सस्ती कनेक्टिविटी, व्यापक नेटवर्क विस्तार और नई तकनीक ने क्षेत्र के दूरसंचार बाजार को किस तरह बदला है। आने वाले वर्षों में 5जी और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड का विस्तार इस बदलाव को और गति दे सकता है।

 

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