मुंबई: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर वैश्विक क्रिप्टो बाजार पर दिखाई देने लगा है। महंगाई को लेकर फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद निवेशकों में जोखिम वाली संपत्तियों को लेकर सतर्कता बढ़ी है। इसका सीधा असर बिटकॉइन पर पड़ा और इसकी कीमत शुक्रवार को 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे चली गई।
फेड के चेयरमैन केविन वॉर्श के महंगाई को लेकर दिए गए सख्त संकेतों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। उन्होंने संकेत दिया कि महंगाई में अभी इतनी कमी नहीं आई है कि फेड अपने 2 प्रतिशत के लक्ष्य को लेकर आश्वस्त हो सके। इस रुख से बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या जरूरत पड़ने पर दरों में बढ़ोतरी का रास्ता भी अपना सकता है।
ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर निवेशकों की रणनीति पर तुरंत दिखाई दिया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 4.7 प्रतिशत पहुंच गई। जब सुरक्षित माने जाने वाले बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है, तो निवेशक अक्सर ज्यादा जोखिम वाली परिसंपत्तियों से पैसा निकालने लगते हैं। बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी को इसी तरह की जोखिम वाली संपत्तियों में शामिल किया जाता है।
क्रिप्टो बाजार में दबाव बढ़ने के साथ निवेशकों के बीच मुनाफावसूली भी तेज हुई। इससे पहले बिटकॉइन ने लगातार सात दिनों में करीब 23 प्रतिशत की तेजी दर्ज की थी। यह लगभग तीन वर्षों में उसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त बताई गई थी। इतनी तेज तेजी के बाद कीमतों में कुछ गिरावट को निवेशकों द्वारा मुनाफा सुरक्षित करने के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।
बाजार का मूड बताने वाला फियर एंड ग्रीड इंडेक्स भी इस बदलाव को दर्शा रहा है। इंडेक्स पहले ‘अत्यधिक लालच’ के स्तर पर था, लेकिन गिरावट के बाद यह 78 अंक पर आ गया, जिसे ‘सामान्य लालच’ की श्रेणी में रखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का उत्साह पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है, अमेरिकी डॉलर में भी हालिया मजबूती ने बिटकॉइन पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। आमतौर पर डॉलर की मजबूती को क्रिप्टो जैसी जोखिम वाली परिसंपत्तियों के लिए चुनौती माना जाता है। जब अमेरिकी मुद्रा मजबूत होती है, तो डॉलर में निवेश और अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है। इससे बिटकॉइन में नई खरीदारी की गति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में भी बदलाव आया है। उपलब्ध आकलनों के अनुसार, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना 36 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यदि बाजार में दरों को लेकर सख्त रुख की धारणा बनी रहती है तो क्रिप्टो सहित अन्य जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
बिटकॉइन की मौजूदा स्थिति को उसके पिछले रिकॉर्ड स्तर के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अक्टूबर 2025 में करीब 1.26 लाख डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद मौजूदा कीमत उससे लगभग 37 प्रतिशत नीचे बताई जा रही है। हालांकि, हालिया साप्ताहिक तेजी ने यह भी दिखाया कि निवेशकों की दिलचस्पी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।विशेषज्ञों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण संकेत अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की आगामी नीति दिशा होगी। यदि महंगाई में अपेक्षित गिरावट नहीं आती है तो ऊंची ब्याज दरों की संभावना बाजार में बनी रह सकती है।
इसके विपरीत, महंगाई में नरमी आने पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों को फिर से समर्थन मिल सकता है। सितंबर की शुरुआत में क्रिप्टो बाजार इसलिए कई कारकों के बीच झूलता नजर आ सकता है। एक तरफ बिटकॉइन की हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली है, वहीं दूसरी ओर ब्याज दरों को लेकर चिंता और डॉलर की मजबूती निवेशकों को सतर्क रहने के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे माहौल में बिटकॉइन समेत प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।