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हैप्पीएस्ट माइंड्स मर्जर से आईटीसी इन्फोटेक मजबूत, अमेरिका में बढ़ेगी पहुंच

मुंबई: आईटी क्षेत्र में विस्तार और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कॉरपोरेट कदम सामने आया है। आईटीसी इन्फोटेक और हैप्पीएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज ने करीब 1,330 करोड़ रुपये के सौदे के तहत विलय की घोषणा की है। इस प्रस्तावित मर्जर के बाद दोनों कंपनियों की क्षमताएं एक मंच पर […]

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  • September 1, 2026 1:45 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई: आईटी क्षेत्र में विस्तार और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कॉरपोरेट कदम सामने आया है। आईटीसी इन्फोटेक और हैप्पीएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज ने करीब 1,330 करोड़ रुपये के सौदे के तहत विलय की घोषणा की है। इस प्रस्तावित मर्जर के बाद दोनों कंपनियों की क्षमताएं एक मंच पर आएंगी और एक बड़ी आईटी सेवा कंपनी के रूप में संयुक्त कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना है।

इस सौदे में हैप्पीएस्ट माइंड्स के प्रमुख प्रमोटर अशोक सूता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह अपनी करीब 22 प्रतिशत हिस्सेदारी 395 रुपये प्रति शेयर के मूल्य पर बेचेंगे। वहीं, विलय के लिए शेयर स्वैप अनुपात भी तय किया गया है। इसके तहत हैप्पीएस्ट माइंड्स के शेयरधारकों को प्रत्येक 81 शेयर के बदले आईटीसी इन्फोटेक के 25 शेयर दिए जाएंगे।

विलय पूरा होने के बाद आईटीसी इन्फोटेक में उसकी मूल कंपनी आईटीसी की हिस्सेदारी करीब 73.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस तरह संयुक्त कंपनी पर आईटीसी का नियंत्रण मजबूत बना रहेगा, जबकि हैप्पीएस्ट माइंड्स की तकनीकी क्षमताएं, ग्राहक आधार और बाजार पहुंच भी नए कारोबारी ढांचे का हिस्सा बन जाएंगी।  इसमें 19 हजार से अधिक कर्मचारी काम करेंगे और कंपनी के पास करीब 800 ग्राहकों का संयुक्त आधार होगा। इससे विभिन्न उद्योगों में आईटी सेवाएं उपलब्ध कराने और बड़े वैश्विक ग्राहकों को एक व्यापक सेवा पोर्टफोलियो देने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

मर्जर के बाद कंपनी का कारोबार बढ़ाने पर भी स्पष्ट जोर दिया गया है। नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद संयुक्त इकाई की कुल आय लगभग 7,033 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2028 तक सालाना आय को 1 अरब डॉलर यानी करीब 9,522 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय आईटी सेवा कंपनियां वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर विस्तार और अधिग्रहण की रणनीति अपना रही हैं। कंपनियां क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल इंजीनियरिंग और डेटा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में तेजी से निवेश कर रही हैं। ऐसे में दोनों कंपनियों का एक साथ आना प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है। हैप्पीएस्ट माइंड्स के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की आय 12.3 प्रतिशत बढ़कर 2,315 करोड़ रुपये पहुंच गई थी। दूसरी ओर, इसी अवधि में आईटीसी इन्फोटेक की आय करीब 4,718 करोड़ रुपये रही।

दोनों कारोबारों को एक साथ जोड़ने से राजस्व का आधार बढ़ेगा और बड़े ग्राहकों के लिए सेवाओं की व्यापक पेशकश तैयार करने का अवसर मिलेगा। इस विलय का एक महत्वपूर्ण फायदा अमेरिकी बाजार में कंपनी की पहुंच को मजबूत करना भी माना जा रहा है। अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। संयुक्त कंपनी के पास ज्यादा ग्राहक, व्यापक तकनीकी विशेषज्ञता और बड़ी डिलीवरी क्षमता होने से वहां नए कारोबारी अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।

मर्जर से दोनों कंपनियों के संसाधनों और विशेषज्ञता को एक साथ इस्तेमाल करने की संभावना भी बढ़ेगी। ग्राहक प्रबंधन, तकनीकी समाधान, डिलीवरी नेटवर्क और वैश्विक बिक्री जैसे क्षेत्रों में तालमेल से परिचालन क्षमता में सुधार हो सकता है। हालांकि, किसी भी बड़े विलय की तरह इस सौदे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों संगठनों की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों और कारोबारी प्रक्रियाओं को कितनी प्रभावी तरीके से एकीकृत किया जाता है।अंतिम रूप से विलय को पूरा करने के लिए संबंधित नियामकीय और अन्य आवश्यक मंजूरियां हासिल करनी होंगी।

इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही संयुक्त कंपनी नए ढांचे के तहत पूरी तरह काम कर सकेगी।कुल मिलाकर, 1,330 करोड़ रुपये का यह सौदा भारतीय आईटी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट संयोजन है। आईटीसी इन्फोटेक और हैप्पीएस्ट माइंड्स के एक साथ आने से कर्मचारियों, ग्राहकों, राजस्व और वैश्विक पहुंच के लिहाज से एक बड़ा कारोबारी मंच तैयार होगा। अब निगाहें नियामकीय मंजूरियों और संयुक्त कंपनी द्वारा 2028 तक 1 अरब डॉलर की आय का लक्ष्य हासिल करने की रणनीति पर रहेंगी।

 

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