4 दिन से नहीं हिली खड़े हनुमान प्रतिमा, पुलिस ने बजाया बैंड

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में इन दिनों सड़क चौड़ीकरण के बीच खड़े हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर श्रद्धालुओं तक सभी का ध्यान खींच लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर परिसर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रशासन ने प्रतिमा को दूसरी जगह […]

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  • September 10, 2026 1:37 pm IST, Published 1 hour ago

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में इन दिनों सड़क चौड़ीकरण के बीच खड़े हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर श्रद्धालुओं तक सभी का ध्यान खींच लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर परिसर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रशासन ने प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की, लेकिन भारी मशीनरी और तकनीकी प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। चार दिनों तक लगातार कोशिशों के बाद जब मशीनें भी कामयाब नहीं हो सकीं तो पुलिस अधिकारी और जवान बैंड-बाजे के साथ मंदिर परिसर पहुंचे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

भारी मशीनें लगीं, लेकिन प्रतिमा टस से मस नहीं हुई

मामला उज्जैन के सती गेट क्षेत्र स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर से जुड़ा है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत शहर में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी परियोजना के तहत कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। मंदिर का भवन सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के बाद उसे हटाने की कार्रवाई की गई।

इसके बाद करीब आठ फीट ऊंची खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करने की योजना बनाई गई। प्रशासन और नगर निगम की ओर से क्रेन, जेसीबी और दूसरी भारी मशीनों की मदद से प्रतिमा को उठाने की कोशिश की गई। रिपोर्टों के मुताबिक चार दिनों में कई बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से हिली तक नहीं।

मशीनों से लगातार प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिलने से प्रशासन के सामने तकनीकी चुनौती खड़ी हो गई। अब विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक स्थापित है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए किस तरह स्थानांतरित किया जा सकता है।

जब मशीनें नाकाम हुईं तो बैंड-बाजे के साथ पहुंची पुलिस

प्रतिमा को हटाने के प्रयासों के बीच बुधवार को एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। पुलिस के जवान और अधिकारी बैंड-बाजे के साथ खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। इस दौरान धार्मिक माहौल दिखाई दिया और प्रतिमा के सामने पूजा-पाठ और भक्ति का दौर भी देखने को मिला।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर के आसपास दिखाई दे रहे हैं। इस घटना को लेकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ श्रद्धालु इसे भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं, जबकि तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिमा की संरचना, वजन और जमीन के भीतर उसकी स्थिति की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

श्रद्धालुओं में बढ़ी आस्था, मंदिर में उमड़ रही भीड़

प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर फैलने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस घटना को और चर्चा में ला दिया है।

रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयासों के दौरान बड़ी संख्या में बंदरों के मंदिर परिसर में पहुंचने की बात सामने आई थी। इसे लेकर भी सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि ऐसी घटनाओं की धार्मिक व्याख्या अलग-अलग लोगों की आस्था पर निर्भर करती है और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता।

अब IIT इंदौर की मदद से निकलेगा समाधान

प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी है। रिपोर्टों के अनुसार IIT इंदौर की टीम से प्रतिमा की स्थिति और उसके आधार की जांच में मदद मांगी गई है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे किस प्रकार की संरचना मौजूद है।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारी मशीनों से प्रतिमा को खींचने या उठाने का प्रयास प्रतिमा को नुकसान पहुंचा सकता है। प्रशासन अब किसी भी तरह की जल्दबाजी के बजाय तकनीकी समाधान तलाशने पर जोर दे रहा है।

विकास और आस्था के बीच खड़ा हुआ सवाल

उज्जैन में सामने आया यह मामला केवल एक प्रतिमा को स्थानांतरित करने तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ विकास और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन का सवाल भी जुड़ गया है। एक तरफ सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर में सड़क और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ प्राचीन धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी भावनाओं को सुरक्षित रखना भी प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।

श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की ओर से प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग भी उठ रही है। इसी बीच प्रशासन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि संबंधित पक्षों की सहमति और संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

चमत्कार या तकनीकी रहस्य? जवाब का इंतजार

खड़े हनुमान की प्रतिमा के नहीं हिलने को लेकर भक्त इसे भगवान की शक्ति और संकेत मान रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों की नजर इसके पीछे मौजूद भौतिक और संरचनात्मक कारणों पर है। संभव है कि प्रतिमा का आधार जमीन के भीतर काफी गहराई तक हो या उसके नीचे ऐसी संरचना मौजूद हो, जिसके कारण उसे सामान्य मशीनों से उठाना मुश्किल हो रहा हो।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि प्रतिमा को किसी नुकसान के बिना सुरक्षित रखना और सड़क चौड़ीकरण की योजना के साथ उचित समाधान निकालना प्रशासन के सामने चुनौती है। तकनीकी जांच और विशेषज्ञों की राय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्रतिमा को स्थानांतरित किया जा सकता है या उसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।

उज्जैन की इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि आधुनिक विकास परियोजनाओं के बीच ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, तकनीकी विशेषज्ञता और स्थानीय लोगों के साथ संवाद कितना जरूरी है। फिलहाल खड़े हनुमान अपनी जगह पर कायम हैं और उनके इर्द-गिर्द आस्था, तकनीक और प्रशासन—तीनों की चर्चा तेज हो गई है।

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