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विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ: पीएम मोदी

नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को भविष्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्यों के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। भारत का प्रयास है कि विकास की […]

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  • September 19, 2026 11:42 am IST, Published 6 hours ago
नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को भविष्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्यों के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। भारत का प्रयास है कि विकास की गति बनाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

प्रधानमंत्री ने शनिवार को विज्ञान भवन में ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से 19 और 20 सितंबर को किया जा रहा है। सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक, वैज्ञानिक और प्रशासनिक नजरिये से चर्चा की जा रही है।

कार्यक्रम में भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के साथ जिला न्यायपालिका के अधिकारी, विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधि, पर्यावरण विशेषज्ञ, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 17 देशों के न्यायाधीश और न्यायिक प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हुए हैं।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को विकास की प्रक्रिया से अलग करके नहीं देखा जा सकता। आने वाले समय में ऐसी नीतियों और तकनीकों की जरूरत होगी, जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करें। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल और उनके संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

दुनिया इस समय जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और पर्यावरणीय क्षरण जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनका प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, जल सुरक्षा, जैव विविधता, शहरी व्यवस्था और लोगों की आजीविका पर भी पड़ रहा है। ऐसे में जलवायु और पर्यावरण से जुड़ी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ उनकी निगरानी और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी माना जा रहा है।

सम्मेलन का उद्देश्य अलग-अलग देशों और संस्थानों के अनुभवों को साझा करना तथा पर्यावरणीय मामलों से निपटने के प्रभावी तरीकों पर चर्चा करना है। इसमें पर्यावरण कानून, न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति निर्माण और पर्यावरणीय शासन व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है। पर्यावरण से संबंधित नियमों को लागू करने और उनके प्रभावी पालन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की जा रही है।

सम्मेलन में पर्यावरण प्रभाव आकलन, आर्द्रभूमि संरक्षण और पर्यावरणीय संस्थाओं की भूमिका जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में हैं। राज्य स्तर के पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों, विशेषज्ञ समितियों और आर्द्रभूमि प्राधिकरणों से जुड़े प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पर्यावरणीय फैसलों में वैज्ञानिक मूल्यांकन, प्रशासनिक प्रक्रिया और न्यायिक दृष्टिकोण के बीच समन्वय पर विचार का अवसर मिल रहा है।

प्रधानमंत्री ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जलवायु परिवर्तन किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित समस्या नहीं है। ऐसे में वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीक और बेहतर पर्यावरणीय प्रक्रियाओं को साझा करना वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मोदी के संबोधन का प्रमुख संदेश यह रहा कि भविष्य का विकास मॉडल आर्थिक अवसरों के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चले। इसके लिए नीतिगत बदलावों के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशासन और व्यापक सामाजिक भागीदारी की आवश्यकता होगी।

दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के न्यायिक और पर्यावरण विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय विवादों के समाधान, जलवायु संबंधी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और पर्यावरणीय शासन को मजबूत करने के लिए संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना है। ऐसे समय में यह संवाद महत्वपूर्ण है, जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय दबाव विकास की योजनाओं के सामने लगातार नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

 

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