नई दिल्ली: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को फोन टैपिंग मामले में मिली जमानत बरकरार रहेगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के जमानत देने के फैसले को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने मामले पर फैसला सुनाते हुए सीबीआई की याचिका को अस्वीकार कर दिया।
यह मामला वर्ष 2009 से 2017 के बीच कथित तौर पर एनएसई से जुड़े फोन टैपिंग और कर्मचारियों की बातचीत की निगरानी से संबंधित है। जांच एजेंसी की ओर से मामले में पूर्व एनएसई अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की गई है। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत चित्रा रामकृष्ण को जमानत प्रदान की गई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद ट्रायल कोर्ट से चित्रा रामकृष्ण को मिली जमानत पर रोक लगाने की सीबीआई की कोशिश सफल नहीं हुई। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए जांच एजेंसी की अपील को खारिज कर दिया।
फोन टैपिंग मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने आरोप लगाया था कि एनएसई के कुछ अधिकारियों और बाहरी लोगों के बीच सांठगांठ के जरिए कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों की बातचीत को कथित तौर पर रिकॉर्ड किया गया। एजेंसी ने मामले में विभिन्न दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की है। हालांकि, जमानत के स्तर पर अदालत का विचार मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित रहता है कि आरोपी को हिरासत में बनाए रखने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं और निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता है या नहीं।
चित्रा रामकृष्ण एनएसई की शीर्ष अधिकारी रही हैं और उनका कार्यकाल भारतीय पूंजी बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण अवधि में रहा था। फोन टैपिंग प्रकरण में उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसी और बचाव पक्ष के बीच अलग-अलग दलीलें सामने आती रही हैं। सीबीआई ने अदालत के समक्ष ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश पर सवाल उठाए थे, जबकि बचाव पक्ष की ओर से जमानत को उचित ठहराया गया।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल चित्रा रामकृष्ण को मिली जमानत प्रभावी बनी हुई है। हालांकि, इस आदेश का अर्थ मामले में आरोपों का अंतिम निपटारा नहीं है। आपराधिक मामले की सुनवाई और उससे जुड़े अन्य कानूनी पहलू आगे भी अदालत के समक्ष जारी रह सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब एनएसई से जुड़े पुराने मामलों में जांच और न्यायिक कार्यवाही लंबे समय से चल रही है। फोन टैपिंग प्रकरण में वर्ष 2009 से 2017 के बीच की घटनाओं और कथित गतिविधियों की जांच की गई है। सीबीआई की अपील खारिज होने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित अदालतों में जारी रहने की संभावना है।