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पूर्व प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के खिलाफ हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया

उमाकांत उमराव भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1996 बैच के अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। देवास में उनके कार्यकाल से जुड़ा प्रशासनिक मॉडल भी चर्चा में रहा है। राज्य सरकार में उन्होंने विभिन्न विभागों में वरिष्ठ पदों पर काम किया

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  • September 24, 2026 5:20 pm IST, Published 2 hours ago

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह आदेश सेवानिवृत्त असिस्टेंट फील्ड वेटेनरी ऑफिसर केके गर्ग की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उमराव की ओर से अब तक अदालत के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर सवाल उठाए और उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।

मामला सेवानिवृत्त अधिकारी केके गर्ग से जुड़ा है, जिनकी सेवा अवधि के दौरान वेतन से एक राशि काटी गई थी। गर्ग ने इस कटौती को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 19 अगस्त 2025 को संबंधित राशि वापस करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इसके लिए 90 दिन की समयसीमा तय की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार निर्धारित अवधि में राशि वापस नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की।

अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पूर्व प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव की उपस्थिति और आदेश के अनुपालन का मुद्दा सामने आया। उस समय उमराव पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि अदालत के निर्देश के बावजूद संबंधित राशि की वापसी नहीं हुई। इसके बाद मामले में अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई और अदालत के आदेश के अनुपालन की स्थिति पर सुनवाई आगे बढ़ी।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि उमराव की ओर से कोर्ट रजिस्ट्री को पत्र भेजा गया, लेकिन व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थिति नहीं हुई और अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की गई। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट की टिप्पणी के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि बिना गैर-जमानती वारंट जारी किए पूर्व प्रमुख सचिव अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे।

हाई कोर्ट ने वारंट की तामीली के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नर को आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं। अब पुलिस को अदालत के आदेश के अनुसार वारंट की कार्रवाई करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। उस तारीख पर मामले में आगे की स्थिति और अदालत के निर्देशों के अनुपालन से संबंधित जानकारी सामने आ सकती है।

उमाकांत उमराव भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1996 बैच के अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश में अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। देवास में उनके कार्यकाल से जुड़ा प्रशासनिक मॉडल भी चर्चा में रहा है। राज्य सरकार में उन्होंने विभिन्न विभागों में वरिष्ठ पदों पर काम किया। हाल के प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव पद से हटाकर राजस्व मंडल ग्वालियर में सदस्य के तौर पर पदस्थ किया गया था।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अधिकारियों की अदालत में उपस्थिति और न्यायिक आदेशों के अनुपालन से जुड़े मामलों में पहले भी सख्त आदेश सामने आए हैं। खबर के अनुसार जस्टिस विवेक जैन की अदालत की ओर से इससे पहले पन्ना की कलेक्टर उषा परमार और छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडेय के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं। ऐसे मामलों में अदालत का मुख्य उद्देश्य संबंधित अधिकारी की न्यायिक प्रक्रिया में उपस्थिति और उसके आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करना होता है।

केके गर्ग से जुड़े इस मामले में अब अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। तब तक वारंट की तामीली और संबंधित पक्षों की ओर से अदालत के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव की अदालत में उपस्थिति इस मामले का प्रमुख विषय बन गई है।

 

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