असम में मुस्लिम विवाह पर बड़ा फैसला, जानिए नए नियम क्या हैं

हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने मुस्लिम विवाह पंजीकरण नियम 2026 को दी मंजूरी, अब काजियों के बजाय सरकारी रजिस्ट्रार करेंगे शादियों का पंजीकरण।

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  • September 25, 2026 10:13 pm IST, Published 2 hours ago

गुवाहाटी : असम में मुस्लिम विवाहों के पंजीकरण को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में गुरुवार, 24 सितंबर को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में असम मुस्लिम विवाह पंजीकरण (अनिवार्य) नियम, 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद राज्य में मुस्लिम विवाहों के पंजीकरण की जिम्मेदारी सरकारी रजिस्ट्रार संभालेंगे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य पूरे प्रदेश में विवाह पंजीकरण की एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया स्थापित करना है।

अब काजी नहीं, सरकारी रजिस्ट्रार करेंगे पंजीकरण

नई व्यवस्था के तहत मुस्लिम विवाहों का कानूनी पंजीकरण सरकारी रजिस्ट्रार के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि सरकार पहले ही काजियों के माध्यम से विवाह पंजीकरण की पुरानी व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय ले चुकी थी। हालांकि, उसके स्थान पर वैकल्पिक पंजीकरण प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। अब नए नियमों की मंजूरी के साथ यह स्थिति स्पष्ट हो गई है। मुस्लिम दंपती निर्धारित सरकारी कार्यालयों में जाकर अपने विवाह का पंजीकरण करा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आवेदन अधिक होने पर पंचायत स्तर के अधिकारियों को पंजीकरण का अधिकार दिया जा सकता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

वर्ष 2024 के कानून के तहत बनाए गए नए नियम

असम सरकार ने नए नियम असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम, 2024 की धारा 25 के अंतर्गत तैयार किए हैं। इस अधिनियम को अक्टूबर 2024 में राज्यपाल की मंजूरी मिली थी। इसके माध्यम से वर्ष 1935 के पुराने मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण कानून का स्थान नई कानूनी व्यवस्था ने लिया।पुराने कानून में काजियों के माध्यम से विवाह और तलाक के पंजीकरण का प्रावधान था। नई व्यवस्था में यह जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों को सौंपी गई है। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम के साथ विवाह और तलाक से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना भी है।

विवाह की न्यूनतम उम्र और सहमति पर जोर

नए कानूनी ढांचे में विवाह की निर्धारित न्यूनतम उम्र का पालन आवश्यक है। विवाह के समय महिला की उम्र कम से कम 18 वर्ष और पुरुष की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त विवाह में दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति भी महत्वपूर्ण है। सरकार का कहना है कि अनिवार्य पंजीकरण से विवाह से संबंधित कानूनी दस्तावेज उपलब्ध होंगे और बाल विवाह रोकने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव विवाह के आधिकारिक पंजीकरण से संबंधित है। मुस्लिम समुदाय के लोग अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार निकाह कर सकेंगे, लेकिन विवाह का सरकारी पंजीकरण निर्धारित रजिस्ट्रार के माध्यम से कराना होगा।वर्ष 2024 के अधिनियम में विवाह के 30 दिनों के भीतर पंजीकरण का प्रावधान है। इसी प्रकार तलाक का पंजीकरण भी निर्धारित अवधि के भीतर कराना आवश्यक है। पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज भविष्य में वैवाहिक स्थिति प्रमाणित करने और कानूनी मामलों में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया, निर्धारित शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना देखना जरूरी होगा।

महिला स्वयं सहायता समूहों को भी राहत

मुस्लिम विवाह पंजीकरण के अलावा असम मंत्रिमंडल ने महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जिन सदस्यों को आधार नामांकन पूरा नहीं होने के कारण बैंक ऋण प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, उन्हें 31 मार्च 2027 तक आधार नामांकन पूरा करने के लिए एकमुश्त छूट दी गई है। इस निर्णय से संबंधित महिलाओं को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

मत्स्य पालन के लिए 796.88 करोड़ की परियोजना

राज्य मंत्रिमंडल ने असम सस्टेनेबल वेटलैंड एंड इंटीग्रेटेड फिशरीज ट्रांसफॉर्मेशन (SWIFT) परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 796.88 करोड़ रुपये है। इसके अंतर्गत मत्स्य पालन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने और 102 सामुदायिक जलाशयों के पुनरुद्धार की योजना है। परियोजना के लिए एशियाई विकास बैंक से ऋण सहायता प्राप्त होगी, जबकि शेष धनराशि राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।

नए नियमों के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

मुस्लिम विवाह पंजीकरण संबंधी नियमों को मंजूरी मिलने के बाद अब उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर ध्यान रहेगा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रजिस्ट्रार की उपलब्धता, आवेदन प्रक्रिया और नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। सरकार ने अधिक आवेदन मिलने की स्थिति में पंचायत स्तर तक पंजीकरण सुविधा पहुंचाने की बात कही है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जिला मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

वहीं, विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर नागरिकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना भी आवश्यक होगा। सरकारी अधिसूचनाओं से यह स्पष्ट होगा कि नए नियमों के तहत आवेदन कैसे स्वीकार किए जाएंगे और विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारियां क्या होंगी। असम सरकार का यह निर्णय राज्य में मुस्लिम विवाहों के आधिकारिक पंजीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिवर्तन है। आने वाले समय में इसके क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों को पंजीकरण सुविधाएं कितनी आसानी से उपलब्ध हो पाती हैं।

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