कुशीनगर: में नारायणी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। नेपाल की पहाड़ियों में लगातार हुई बारिश के बाद नदी में पानी की आवक बढ़ी है। इसके साथ ही गंडक बैराज से नारायणी नदी में बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। प्रशासन संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए नदी के आसपास के इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
जानकारी के मुताबिक दोपहर 12 बजे गंडक बैराज से नारायणी नदी में करीब 2 लाख 90 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। पानी छोड़े जाने के बाद नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश का सीधा असर नारायणी नदी के प्रवाह पर पड़ रहा है। नदी में पानी बढ़ने के साथ तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।
संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। अधिकारियों को तटबंधों और नदी के किनारे की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में एडीएम पवन कुमार ने छितौनी तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने तटबंध की स्थिति और नदी के बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया। अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था और संभावित परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों की जानकारी भी ली गई।
छितौनी तटबंध क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए प्रशासन की ओर से विशेष निगरानी की जा रही है। तटबंध पर किसी तरह की कमजोरी या कटाव की स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को तैयार रहने को कहा गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच ठोकर नंबर-3 पर एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया गया है। टीम को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए तैयार रखा गया है। प्रशासन की कोशिश है कि नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी या तटबंध से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके।
गंडक बैराज से छोड़े गए पानी के कारण आने वाले समय में नारायणी नदी के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी के बेहद करीब न जाएं और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों के अनुसार नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और नदी में पानी की आवक की लगातार निगरानी की जा रही है। बैराज से पानी छोड़े जाने की मात्रा और नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन, सिंचाई विभाग और राहत-बचाव टीमों के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
कुशीनगर में प्रशासन की सक्रियता का मुख्य उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में जान-माल के नुकसान को रोकना है। तटबंधों के निरीक्षण के साथ संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बल और बचाव दल की मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे।
नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम और प्रशासन की सूचनाओं पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। नदी का जलस्तर और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति प्रशासन के लिए फिलहाल प्रमुख निगरानी का विषय बनी हुई है।