गया : बिहार के गया में चल रहे पितृपक्ष मेले के दौरान शुक्रवार को आस्था और परंपरा का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। रूस, यूक्रेन, जर्मनी समेत विभिन्न देशों से आए 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के देवघाट पर अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान किया। विदेशी श्रद्धालुओं का यह समूह सनातन परंपरा के अनुसार विधि-विधान से कर्मकांड में शामिल हुआ। फल्गु तट पर विदेशी श्रद्धालुओं को पारंपरिक तरीके से पिंडदान करते देख वहां मौजूद लोगों की भीड़ भी आकर्षित हुई।
देवघाट पर हुआ तर्पण और पिंडदान
पितृपक्ष के दौरान गया जी को पितरों के तर्पण और पिंडदान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में माना जाता है। शुक्रवार को देवघाट पर पहुंचे विदेशी श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधियों में हिस्सा लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस समूह में रूस के छह, जर्मनी के 11, यूक्रेन के दो तथा इटली और लातविया के एक-एक श्रद्धालु शामिल थे।
श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर तर्पण करने के साथ पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान धार्मिक कर्मकांडों को समझने और उन्हें निर्धारित विधि के अनुसार पूरा करने के लिए स्थानीय पंडितों की सहायता ली गई। रिपोर्टों के मुताबिक इस समूह का नेतृत्व बनारस के पंडित लोकनाथ गौड़ कर रहे हैं।
तीन दिनों तक विभिन्न पिंडवेदियों पर होंगे अनुष्ठान
विदेशी श्रद्धालुओं का गया प्रवास केवल एक दिन के कर्मकांड तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार वे करीब तीन दिनों तक गया में रहकर अलग-अलग पिंडवेदियों पर पिंडदान और संबंधित धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगे।
गया में पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने मेले के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। फल्गु नदी के किनारे पिंडदान करते विदेशी श्रद्धालुओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
रूस और यूक्रेन के श्रद्धालुओं ने साथ किया अनुष्ठान
इस आयोजन का एक विशेष पहलू यह भी रहा कि रूस और यूक्रेन से आए श्रद्धालु एक ही धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए। दोनों देशों के बीच जारी युद्ध की पृष्ठभूमि के बावजूद अलग-अलग देशों से आए श्रद्धालु गयाजी में अपने पूर्वजों की स्मृति में धार्मिक कर्मकांड करते दिखाई दिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार को रूस के छह और यूक्रेन के दो श्रद्धालुओं ने अन्य विदेशी श्रद्धालुओं के साथ देवघाट पर पिंडदान और तर्पण किया।
हालांकि इस घटनाक्रम का मूल उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना था। इसे लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सोशल मीडिया पर सामने आ सकती हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में श्रद्धालुओं के गया पहुंचने का प्रमुख कारण पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान बताया गया है।
सनातन परंपरा में पितृपक्ष का विशेष महत्व
हिंदू धार्मिक परंपरा में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की अवधि माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मकांड करते हैं।
गया का धार्मिक महत्व विशेष रूप से पिंडदान से जुड़ा हुआ है। फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर क्षेत्र और विभिन्न पिंडवेदियों पर पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालुओं का यहां आना पिछले कुछ वर्षों में समाचारों में दर्ज हुआ है।
विदेशी श्रद्धालुओं में दिखा भारतीय परंपरा के प्रति आकर्षण
विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय धार्मिक परंपराओं में भागीदारी का यह दृश्य सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण दिखाई देता है। रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और अन्य देशों से आए श्रद्धालुओं ने स्थानीय धार्मिक प्रक्रिया को समझते हुए पिंडदान किया।
हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि पितृपक्ष के दौरान गया पहुंचने वाले विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या में विविधता दिखाई दे रही है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष पितृपक्ष मेले के दौरान कुल 48 विदेशी श्रद्धालुओं द्वारा फल्गु नदी के किनारे पिंडदान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह संख्या स्थानीय श्रद्धालुओं की तुलना में भले ही कम हो, लेकिन अलग-अलग देशों से लोगों का इस धार्मिक आयोजन में शामिल होना गया की अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिहाज से उल्लेखनीय है।
घाट पर उमड़ी लोगों की भीड़
विदेशी श्रद्धालुओं को पारंपरिक तरीके से पिंडदान करते देखने के लिए देवघाट पर मौजूद लोगों में भी उत्सुकता दिखाई दी। सामान्य तौर पर पितृपक्ष के दौरान घाटों पर बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसी माहौल में जब विदेशी श्रद्धालु भी समान धार्मिक प्रक्रिया में शामिल हुए तो यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में विदेशी महिलाएं भारतीय परिधान में धार्मिक अनुष्ठान में बैठी दिखाई दे रही हैं। हालांकि किसी वायरल तस्वीर या वीडियो की हर जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक होती है।
गयाजी की धार्मिक पहचान को मिला अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
गया लंबे समय से पिंडदान और पितृकर्म के लिए देशभर के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र रहा है। पितृपक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहुंचते हैं। इस वर्ष भी मेले के शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे में विदेशी श्रद्धालुओं का फल्गु नदी के देवघाट पर पिंडदान करना इस आयोजन की अंतरराष्ट्रीय पहुंच की एक तस्वीर प्रस्तुत करता है। रूस, यूक्रेन और जर्मनी सहित विभिन्न देशों से आए इन श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की स्मृति में भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार कर्मकांड पूरा किया।
गयाजी में विदेशी श्रद्धालुओं की यह भागीदारी पितृपक्ष मेले के दौरान धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारतीय परंपराओं के वैश्विक आकर्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दृश्य बनकर सामने आई है।