मेघालय में 13 लाख टन से ज्यादा कोयला गायब

हाईकोर्ट समिति ने जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की शिलांग। मेघालय में रिकॉर्ड में दर्ज 13.02 लाख टन से अधिक कोयले के गायब होने का मामला सामने आया है। मेघालय हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने इस मामले की विस्तृत जांच कराने और कोयले की कमी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर जवाबदेही […]

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  • October 8, 2026 9:19 am IST, Published 2 hours ago

हाईकोर्ट समिति ने जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की

शिलांग। मेघालय में रिकॉर्ड में दर्ज 13.02 लाख टन से अधिक कोयले के गायब होने का मामला सामने आया है। मेघालय हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने इस मामले की विस्तृत जांच कराने और कोयले की कमी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी.पी. काताके की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी 41वीं अंतरिम रिपोर्ट में कहा है कि डिप्टी कमिश्नर की ओर से कराए गए भौतिक सत्यापन के बाद कोयले की इतनी बड़ी मात्रा में कमी होने को लेकर कोई विवाद नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को माना संरक्षक

समिति के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को इस कोयले का संरक्षक माना है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में कोयले के रिकॉर्ड से गायब होने के मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनकी जवाबदेही तय करने के लिए गहन जांच जरूरी है।

समिति ने यह भी सिफारिश की है कि अवैध रूप से खनन किए गए कोयले से संबंधित लंबित एफआईआर की जांच में तेजी लाई जाए। रिपोर्ट में मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

करीब 52 हजार ट्रक लोड के बराबर कोयला

रिपोर्ट में कोयले की गायब मात्रा का अंदाजा लगाने के लिए ट्रकों की क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। यदि एक ट्रक में करीब 25 टन कोयला लादा जाए तो 13.02 लाख टन कोयला लगभग 52 हजार ट्रक लोड के बराबर होगा।

समिति के अनुमान के अनुसार, यदि प्रतिदिन 100 ट्रक कोयला परिवहन करें, तो इतनी बड़ी मात्रा को ढोने में करीब 520 दिन, यानी लगभग डेढ़ साल का समय लगेगा।

समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोयले के गायब होने के कारणों की विस्तृत जांच और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

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