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57वीं GST परिषद बैठक में सुधारों पर जोर, राज्यों ने फैसलों का स्वागत किया

जीएसटी परिषद केंद्र और राज्यों के बीच कर व्यवस्था को लेकर सहमति बनाने वाला प्रमुख मंच है। इसकी बैठकों में कर दरों, नियमों, अनुपालन और कारोबार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है। 57वीं बैठक में भी राज्यों की अलग-अलग परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुधारों पर विचार किया गया।

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Gauravshali Bharat News
  • October 8, 2026 6:20 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली: भारत मंडपम में जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की। बैठक में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था को और अधिक सरल, प्रभावी तथा कारोबार के अनुकूल बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के बाद विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने इसमें लिए गए फैसलों और सुधारों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जीएसटी परिषद की बैठक को आम लोगों के लिए राहत देने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में जिन सुधारों को आगे बढ़ाया गया है, उनका वह स्वागत करते हैं। सावंत के मुताबिक, इस बार की चर्चा में लोगों को होने वाली परेशानियों को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य कर प्रणाली को ज्यादा सुविधाजनक बनाना और आम नागरिकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान करना है।

पश्चिम बंगाल की ओर से बैठक में शामिल वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने भी जीएसटी को राज्य के राजस्व के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के राजस्व में जीएसटी की बड़ी भूमिका है और लंबे समय से राज्य के लिए यह कर व्यवस्था फायदेमंद रही है। उनके मुताबिक, जीएसटी से जुड़े अलग-अलग प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने से राज्यों और कारोबारियों दोनों के लिए कामकाज आसान हो सकता है।

दासगुप्ता ने विशेष रूप से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को लेकर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस बार के संरचनात्मक सुधारों में कारोबार को सरल बनाने और प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने पर काफी जोर दिखाई दिया। उनका मानना है कि इन बदलावों का फायदा तत्काल के साथ-साथ लंबी अवधि में भी राज्यों को मिलेगा। नियमों के अनुपालन को लेकर आने वाली दिक्कतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में बढ़ती जागरूकता से अनुपालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री के अनुसार, राज्य में कर संबंधी नियमों का पालन कई बार चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में प्रक्रियाओं को सरल और स्पष्ट किए जाने से कारोबारियों तथा सरकार दोनों के लिए स्थिति बेहतर हो सकती है। उन्होंने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों की जरूरतों और सुझावों पर चर्चा के लिए जीएसटी परिषद एक महत्वपूर्ण मंच है।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी परिषद की बैठक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की खासियत यह है कि इसमें सभी राज्य एक साथ बैठकर कर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हैं। उनके मुताबिक, बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि नागरिकों को ज्यादा सुविधाएं कैसे दी जाएं और जीएसटी के पूरे ढांचे को किस तरह सरल बनाया जाए। रेखा गुप्ता ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था के बेहतर क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। उनका कहना था कि किसी भी कर व्यवस्था की सफलता केवल नियम बनाने से नहीं होती, बल्कि उसे जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है। राज्यों के बीच समन्वय और केंद्र के साथ संवाद के जरिए जीएसटी को ज्यादा सुविधाजनक बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

जीएसटी परिषद केंद्र और राज्यों के बीच कर व्यवस्था को लेकर सहमति बनाने वाला प्रमुख मंच है। इसकी बैठकों में कर दरों, नियमों, अनुपालन और कारोबार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती है। 57वीं बैठक में भी राज्यों की अलग-अलग परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुधारों पर विचार किया गया।

बैठक के बाद सामने आए बयानों से संकेत मिलता है कि जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने, नागरिकों की परेशानियां कम करने और कारोबार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। राज्यों ने भी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और अनुपालन व्यवस्था को बेहतर करने की जरूरत पर बल दिया। इससे आने वाले समय में जीएसटी प्रणाली में और बदलाव तथा सुधार की दिशा तय होने की उम्मीद है।

 

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