नयी दिल्ली: गौतमबुद्ध नगर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए और सख्त रुख अपनाया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अदालत ने सीधे राज्य के डीजीपी को तलब कर लिया।सुनवाई के दौरान जब डीजीपी की व्यस्तता का हवाला दिया गया, तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए गौतमबुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत न्यायिक आदेशों का पालन हर स्थिति में अनिवार्य है और इसमें किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
मामले में याचिकाकर्ता सतिंदर सिंह भसीन को लेकर भी कोर्ट ने कड़ा निर्देश जारी किया। आदेश दिया गया कि वे तुरंत लुकसर जेल, इकोटेक-1 थाने के पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करें। यदि आदेश का पालन नहीं होता है, तो पुलिस को लुकआउट नोटिस जारी करने और सभी एयरपोर्ट्स पर अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नए आपराधिक कानून BNSS, 2023 का भी उल्लेख किया और कहा कि इसके तहत कार्रवाई समयबद्ध और प्रभावी होनी चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में अब किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सभी निर्देशों का पालन किया जाएगा। वहीं राज्य सरकार ने 4 मई 2026 तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की बात कही है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के पालन पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।