नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार संशोधित मासिक जीएसटी रिटर्न फॉर्म पर कारोबारियों, कर विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगेगी। वित्त मंत्रालय की योजना के मुताबिक, इन प्रस्तावित बदलावों को 1 नवंबर 2026 से सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इच्छुक लोग MyGov पोर्टल के माध्यम से 30 नवंबर तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। नए प्रावधानों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबित, सरकार जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने और ऑडिट प्रणाली में सुधार करने की दिशा में काम कर रही है। इन पहलों का मकसद करदाताओं की दिक्कतें कम करना और विभिन्न जीएसटी फॉर्म में दर्ज जानकारी के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में रिटर्न में कर देनदारी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ी गलतियों को सुधारने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने पर सहमति बनी थी। परिषद में केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। इस व्यवस्था के तहत करदाताओं को अपनी देनदारी या आईटीसी में आवश्यक संशोधन करने का अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा। इससे रिटर्न में दर्ज गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है।
प्रस्तावित सुधारों में जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-1ए और इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (आईएफएफ) जैसे फॉर्म शामिल हैं। इन फॉर्मों में दी गई जानकारी का मिलान मासिक कर भुगतान के लिए दाखिल किए जाने वाले जीएसटीआर-3बी से किया जाता है। यदि दोनों जगह दर्ज आंकड़ों में अंतर होता है, तो करदाता को स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है या विभाग की ओर से सूचना अथवा नोटिस जारी किया जा सकता है। नए बदलावों के जरिए इन विवरणों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश की जाएगी।
जीएसटी रिटर्न में कर देनदारी से संबंधित आंकड़े बताते हैं कि किसी कारोबारी को कितना कर जमा करना है, जबकि इनपुट टैक्स क्रेडिट के तहत पात्र कारोबारी अपनी खरीद पर चुकाए गए जीएसटी का निर्धारित शर्तों के अनुसार लाभ ले सकते हैं। इन दोनों विवरणों में गलती होने पर कर भुगतान और क्रेडिट की गणना प्रभावित हो सकती है। प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से करदाताओं को ऐसी त्रुटियों को ठीक करने का अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि रिटर्न के आंकड़ों का बेहतर मिलान होने से अनावश्यक विसंगतियां कम होंगी। इससे केवल तकनीकी या डेटा संबंधी गलतियों के कारण जारी होने वाले स्वचालित नोटिसों की संख्या घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि वास्तविक कर अनियमितताओं या नियमों के उल्लंघन पर विभाग की कार्रवाई समाप्त हो जाएगी। करदाताओं को लागू नियमों के अनुसार सही जानकारी देना और निर्धारित समय पर कर जमा करना जारी रखना होगा।
संशोधित फॉर्म पर सुझाव मांगने की प्रक्रिया कारोबारियों और कर विशेषज्ञों को प्रस्तावित बदलावों पर अपनी राय रखने का अवसर देगी। वे फॉर्म भरने की प्रक्रिया, आंकड़ों के मिलान और संशोधन से संबंधित प्रावधानों में संभावित कठिनाइयों की जानकारी सरकार को दे सकेंगे। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद प्रस्तावित व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय का विधि विभाग संबंधित अधिसूचनाओं और परिपत्रों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इनके सार्वजनिक होने से करदाताओं और उद्योगों को नियमों के क्रियान्वयन के बारे में अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित बदलाव जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में सुधार, कर देनदारी और आईटीसी के आंकड़ों का बेहतर मिलान तथा गलतियों को सुधारने के विकल्प उपलब्ध कराने पर केंद्रित हैं। अब कारोबारियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर आगे की व्यवस्था तय होगी। संशोधित फॉर्म 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है, इसलिए करदाताओं के लिए सुझाव देने की अंतिम तारीख और नए प्रावधानों की जानकारी पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।