भुवनेश्वर में RBI डेटा सेंटर का उद्घाटन, साइबर सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती

प्रधानमंत्री ने अटल पेंशन योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस योजना से करीब नौ करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिला है। ओडिशा में भी लगभग 38 लाख लोग इससे जुड़े हैं।

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  • October 25, 2026 7:20 pm IST, Published 2 hours ago

भुवनेश्वर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के बैंकिंग क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान व्यापक बदलाव हुए हैं। डिजिटल तकनीक के विस्तार ने बैंकिंग सेवाओं को देश के आम नागरिकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पहले बैंकिंग व्यवस्था में अनियमितताओं और चुनिंदा लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने की शिकायतें सामने आती थीं, जिसके कारण बैंकों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए की समस्या का सामना करना पड़ा। अब डिजिटल बैंकिंग और तकनीकी सुधारों के जरिए वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने बैंकिंग सुधारों, डिजिटल इंडिया, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस अवसर पर भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन भी किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे देश की वित्तीय व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी बड़े बदलाव के लिए व्यापक सोच और स्पष्ट लक्ष्य जरूरी हैं। डिजिटल इंडिया के विस्तार से बैंकिंग सेवाओं का उपयोग पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है। अब लोग कई वित्तीय कार्य घर बैठे मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से कर सकते हैं। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और सरकारी योजनाओं के तहत सीधे खातों में राशि पहुंचाने जैसी व्यवस्थाओं ने वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में योगदान दिया है।

उन्होंने मुद्रा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस योजना से लगभग 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने हैं। इस पहल का उद्देश्य छोटे कारोबारियों, स्वरोजगार करने वालों और नए उद्यम शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

प्रधानमंत्री ने अटल पेंशन योजना के तहत सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस योजना से करीब नौ करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिला है। ओडिशा में भी लगभग 38 लाख लोग इससे जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य नागरिकों को भविष्य की आर्थिक अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करना और जरूरतमंद लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना है।

विकास की अवधारणा पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गांवों और छोटे शहरों में भी रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। उनके अनुसार, विकास तभी संतुलित माना जाएगा, जब समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को भी बेहतर जीवन जीने के अवसर मिलें।

प्रधानमंत्री ने सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से छोटे शहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। इससे आवागमन आसान होने के साथ व्यापार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में उन्होंने गांवों में स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का जिक्र किया और कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वित्तीय संस्थानों के डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती जा रही है। साइबर हमलों और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों तथा मजबूत तकनीकी व्यवस्था की जरूरत है। ऐसे संस्थानों से वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा संबंधी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद विकास की अनेक परियोजनाएं बड़े शहरों में केंद्रित रहीं, जबकि देश के कई हिस्सों में लोग लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं की प्रतीक्षा करते रहे।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने नागरिकों के सम्मान और उनकी जरूरतों को सुशासन का आधार बताया। कार्यक्रम में बैंकिंग सुधारों, डिजिटल सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विस्तार को देश की विकास यात्रा से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। अब इन पहलों का प्रभाव इस बात से आंका जाएगा कि वित्तीय सेवाओं की पहुंच, साइबर सुरक्षा, रोजगार और ग्रामीण सुविधाओं में कितना वास्तविक सुधार होता है।

 

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