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सत्येंद्र जैन मानहानि मामले में BJP नेता करनैल सिंह को झटका, याचिका खारिज

इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोप मानहानि की कानूनी परिभाषा के दायरे में आते हैं या नहीं। एक ओर सत्येंद्र जैन ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का...

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  • October 29, 2026 1:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन से जुड़े मानहानि मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक करनैल सिंह को अदालत से झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने करनैल सिंह की रिवीजन याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका के जरिए उन्होंने सत्येंद्र जैन की ओर से दायर मानहानि शिकायत पर संज्ञान लेने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि मानहानि के आरोप साबित हो गए हैं।

यह मामला दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान दिए गए कथित बयानों से जुड़ा है। सत्येंद्र जैन और करनैल सिंह दोनों शकरपुर बस्ती विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में थे। चुनाव प्रचार के दौरान करनैल सिंह ने एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में जैन के खिलाफ कुछ आरोप लगाए थे। सत्येंद्र जैन ने इन बयानों को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए अदालत में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

जैन की शिकायत के मुताबिक, करनैल सिंह ने कथित तौर पर दावा किया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के दौरान उनके परिसर से 37 किलोग्राम सोना मिला था और उनके पास 1,100 एकड़ से अधिक जमीन थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि सिंह ने जैन पर भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए। जैन का कहना है कि इन बयानों से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा। ये आरोप शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।

मामले में निचली अदालत ने 6 जनवरी 2026 को शिकायत पर संज्ञान लेते हुए करनैल सिंह को समन जारी करने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए सिंह ने रिवीजन याचिका दायर की। उनकी ओर से दलील दी गई कि उनके बयान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और ईडी से जुड़ी खबरों पर आधारित थे। उनके पक्ष का कहना था कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को अपने प्रतिद्वंद्वी के बारे में जानकारी देना राजनीतिक संवाद का हिस्सा है।

करनैल सिंह की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि मानहानि कानून में कुछ अपवाद मौजूद हैं और उनके बयानों का मूल्यांकन उन कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में किया जाना चाहिए। इससे पहले 30 अप्रैल 2026 को एक सत्र अदालत ने संज्ञान लेने के आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से विचार के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में भेजा था। अदालत ने कहा था कि कथित बयानों, उपलब्ध सामग्री और मानहानि कानून के संभावित अपवादों पर शुरुआती स्तर पर विचार किया जाना चाहिए।

इसके बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने 29 मई 2026 को शिकायत पर फिर से संज्ञान लिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। करनैल सिंह ने इस आदेश को भी चुनौती दी। अब 29 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनकी नई रिवीजन याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले से शिकायत पर आगे की कार्यवाही जारी रहने का रास्ता खुला है।

इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोप मानहानि की कानूनी परिभाषा के दायरे में आते हैं या नहीं। एक ओर सत्येंद्र जैन ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है, वहीं करनैल सिंह ने अपने बयानों को सार्वजनिक जानकारी से जुड़ा बताया है। अदालत में आगे की प्रक्रिया के दौरान इन दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, रिवीजन याचिका खारिज होने के बाद मामला समाप्त नहीं हुआ है। यह फैसला आरोपों की अंतिम पुष्टि भी नहीं करता। अब आगे की न्यायिक कार्यवाही में यह तय किया जाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर कानून के अनुसार क्या निष्कर्ष निकलता है।

 

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