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राहुल गांधी का ऐलान, मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक निकलेगा विपक्षी मार्च

विपक्ष की इस रैली को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जोड़ रहे हैं, वहीं भाजपा पहले से ही एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए अपना अभियान चला रही है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 30, 2026 4:50 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक नवंबर को होने वाली विपक्ष की रैली से पहले राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली से पहले मार्च निकालने की घोषणा की है। उन्होंने इस कार्यक्रम को किसी एक राजनीतिक दल का आयोजन मानने के बजाय लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़ा व्यापक अभियान बताया है। राहुल गांधी के मुताबिक, इस मार्च में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिकों को भी शामिल होने का मौका मिलेगा।

राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही सोशल मीडिया के माध्यम से मार्च की जानकारी साझा की थी। इसके बाद इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने उनसे मार्च के रास्ते के बारे में सवाल किया। जवाब में राहुल ने बताया कि मार्च मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के जंक्शन से शुरू होकर रामलीला मैदान तक पहुंचेगा। इस दौरान विपक्षी दलों के नेता, कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग एक साथ मार्च करेंगे।

राहुल गांधी ने इस आयोजन में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह मार्च केवल किसी राजनीतिक पार्टी की ताकत दिखाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए है जो मौजूदा परिस्थितियों पर अपनी असहमति दर्ज कराना चाहते हैं। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि, पत्रकार और आम नागरिक भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं।

उन्होंने कारोबारी वर्ग, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े नागरिकों को भी कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है। राहुल का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है। इस बीच, विपक्ष की ओर से शुक्रवार को आयोजित होने वाली मॉक पार्लियामेंट को भी स्थगित कर दिया गया है। राजधानी में बारिश के कारण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। राहुल गांधी ने बताया कि अब यह कार्यक्रम शनिवार को निर्धारित समय पर आयोजित किया जाएगा। मॉक पार्लियामेंट के जरिए विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने की तैयारी कर रहा है।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर विपक्ष के कार्यक्रम में बाधा डालने का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्यों से दिल्ली आने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों को रोकने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। राहुल गांधी ने कहा कि एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली में लोगों की भागीदारी से यह स्पष्ट हो जाएगा कि देश में मताधिकार के मुद्दे को लेकर कितनी नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है और इस विषय पर जनता के बीच गंभीर चिंता बनी हुई है। उनके मुताबिक, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर देशभर में लोगों को जागरूक करना चाहता है।

विपक्ष की इस रैली को चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जोड़ रहे हैं, वहीं भाजपा पहले से ही एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए अपना अभियान चला रही है। दिल्ली में एक नवंबर को होने वाला मार्च और रामलीला मैदान की रैली इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें विपक्ष अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश करेगा। राहुल गांधी की अपील के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभिन्न राज्यों से कितने लोग दिल्ली पहुंचते हैं और इस आयोजन में विपक्षी दलों की भागीदारी कितनी व्यापक रहती है।

 

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