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चुनाव आयोग विवाद में भाजपा का कांग्रेस पर हमला, रिजिजू ने पूछे पांच सवाल

कांग्रेस और INDIA गठबंधन लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और

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Gauravshali Bharat News
  • October 31, 2026 2:40 pm IST, Published 1 hour ago

नईदिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी पर सवालों की बौछार करते हुए पांच सवालों के जवाब मांगे हैं। उन्होंने 2014 से लेकर 2026 तक के चुनावी घटनाक्रम और कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए विपक्षी पार्टी को घेरने की कोशिश की। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस के सामने पांच सवाल रखे। उनका पहला सवाल 2014 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा था। उन्होंने पूछा कि उस चुनाव में कांग्रेस को केवल 44 सीटें ही क्यों मिलीं, जबकि उस समय चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुई थी। रिजिजू ने इस सवाल के जरिए कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष के आरोपों पर जवाब मांगा।रिजिजू का दूसरा सवाल 2024 के लोकसभा चुनाव से संबंधित था। उन्होंने पूछा कि जब ज्ञानेश कुमार उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नहीं थे, तब कांग्रेस लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में हार का सामना कैसे कर गई? केंद्रीय मंत्री का इशारा कांग्रेस की चुनावी हार और उसके बाद चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों की ओर था।तीसरे सवाल में रिजिजू ने कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्रियों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस के मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के बीच पार्टी की ओर से सरकारें बनाने के लिए माफी मांगेंगे? इस सवाल के जरिए उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक तर्कों पर निशाना साधा।

चौथे सवाल में केंद्रीय मंत्री ने मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने चाहिए, जो अवैध प्रवासी हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो अपना निवास स्थान बदल चुके हैं या जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं। रिजिजू का कहना था कि मतदाता सूची में सही और पात्र मतदाताओं के नाम होना जरूरी है। उनका पांचवां सवाल चुनाव आयोग की ओर से पहले कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा था। उन्होंने पूछा कि क्या 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 के दौरान हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण को भी अवैध माना जाएगा? इस सवाल के जरिए उन्होंने कांग्रेस से पुराने चुनावी रिकॉर्ड और मौजूदा SIR प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा। पांच सवालों के साथ किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को खुली चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर एक परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित राजनीति करने और बाहरी ताकतों के साथ मिलकर संविधान तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। ये आरोप रिजिजू की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।

दरअसल, कांग्रेस और INDIA गठबंधन लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं केंद्र सरकार और भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को सही और त्रुटिरहित बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है। इसी राजनीतिक टकराव के बीच कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने 31 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की।
यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर रखा गया।पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को इसकी अध्यक्षता करनी थी, जबकि खरगे को प्रस्ताव पेश करना था और राहुल गांधी को समापन संबोधन देना था।विपक्ष के इस आयोजन का उद्देश्य चुनाव आयोग के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करना और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग उठाना है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘जन महाभियोग’ कोई संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची का मुद्दा एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस किरेन रिजिजू के पांच सवालों का किस तरह जवाब देती है और आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। 

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