खरगे ने अपने भाषण में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयुक्तों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर सवाल उठाए। उन्होंने छह प्रमुख आरोपों के जरिए अपनी बात रखी। इनमें चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कथित साजिश, लगभग 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का दावा, संसद को जानकारी दिए बिना फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET के माध्यम से मतदाता सूचियों पर नियंत्रण, अन्य चुनाव आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से अलग रखने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने जैसे आरोप शामिल रहे।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत देश के वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया गया है। यह अधिकार भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी सुरक्षा करना सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में मताधिकार पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। खरगे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष का किसी चुनाव आयुक्त से व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि उसकी मांग निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। अपने संबोधन की शुरुआत में खरगे ने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार दिया था। खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शुरुआती विचारधारा का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय सार्वभौमिक मताधिकार को लेकर आपत्तियां जताई गई थीं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्ष पूरी ताकत से संघर्ष करेगा।
𝐑𝐞𝐬𝐨𝐥𝐮𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐅𝐨𝐫 𝐓𝐡𝐞 𝐏𝐮𝐛𝐥𝐢𝐜 𝐈𝐦𝐩𝐞𝐚𝐜𝐡𝐦𝐞𝐧𝐭 𝐎𝐟 𝐌𝐫. 𝐆𝐲𝐚𝐧𝐞𝐬𝐡 𝐊𝐮𝐦𝐚𝐫, 𝐂𝐡𝐢𝐞𝐟 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐂𝐨𝐦𝐦𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧𝐞𝐫 𝐎𝐟 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚.
6 Charges against the present CEC —
1️⃣ Conspired to Steal Elections
2️⃣ Deleted 13.2 Crore Voters
3️⃣ Rewrote Form 6 Without Parliamentary Oversight or Knowledge
4️⃣ Seized the Electoral Rolls Through ECINET
5️⃣ Shut Out the Other Two Commissioners
6️⃣ Acted at the Behest of Modi and Shah
— Mallikarjun Kharge (@kharge) October 31, 2026
खरगे ने चुनावी बॉन्ड, सांसदों के निलंबन और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सत्ता में बने रहने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में लगभग 40 लाख नए नाम जोड़े गए, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई। कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्नाटक में मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से कुछ उदाहरण और आंकड़े प्रस्तुत किए थे। खरगे के मुताबिक, चुनाव आयोग से कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन विपक्ष को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया तो इसके बाद SIR की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए खरगे ने कहा कि कांग्रेस मृत मतदाताओं या डुप्लीकेट नामों को सूची में बनाए रखने की मांग नहीं कर रही है। पार्टी चाहती है कि चुनाव आयोग ऐसे नामों को हटाने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए और इसके लिए संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करे। उन्होंने सवाल उठाया कि कितने लोग मृत पाए गए, कितने स्थान बदल चुके हैं और कितने नाम अन्य कारणों से हटाए गए हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा SIR व्यवस्था में कई प्रक्रियागत कमियां हैं और इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। खरगे ने कहा कि विपक्ष ने कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने का प्रयास किया है, लेकिन अब उसे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

मल्लिकार्जुन खरगे अपने भाषण के अंत में खरगे ने केंद्र सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, 2023 में बने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को वापस लेने और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन, जिसका दावा है कि वह देश की लगभग 60 प्रतिशत जनता का प्रतिनिधित्व करता है, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची और SIR को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं। हालांकि, खरगे की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि तथा चुनाव आयोग का पक्ष इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।