दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करने वाले नेताओं में धनंजय मुंडे, सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और दिलीप वाल्से पाटिल शामिल रहे। बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने राज्य सरकार में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी एनसीपी को फिर से दिए जाने का मुद्दा केंद्रीय गृह मंत्री के सामने रखा। इसके अलावा पार्टी के दोनों गुटों के भविष्य और उनके अलग-अलग राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की खबर है।
गौरतलब है कि अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, वित्त मंत्रालय का प्रभार फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। अजित पवार के कार्यकाल में वित्त मंत्रालय एनसीपी के पास रहा था। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस विभाग को वापस हासिल करने की कोशिश को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। दिल्ली में अमित शाह के साथ हुई बैठक में इन दोनों नेताओं के शामिल नहीं होने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सुनेत्रा पवार वर्तमान में सरकार में महत्वपूर्ण पद पर हैं, जबकि पार्थ पवार भी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में अहम भूमिका रखते हैं। ऐसे में पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं की इस मुलाकात में दोनों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान एनसीपी के कुछ युवा नेताओं की कार्यशैली को लेकर भी वरिष्ठ नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक फैसलों और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा होने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।
इस बीच, मुंबई में दिवंगत अजित पवार के आवास पर शाम चार बजे एनसीपी की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करने वाले सभी छह नेता इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। इस बैठक में पार्टी के मौजूदा हालात, संगठनात्मक मुद्दों और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। सुनेत्रा पवार और अन्य प्रमुख नेताओं की भूमिका पर भी सभी की नजरें रहेंगी।
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता नवनाथ बन ने वित्त मंत्रालय को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार में किसे कौन-सा मंत्रालय दिया जाना है, इसका फैसला मुख्यमंत्री का अधिकार क्षेत्र है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस संबंध में निर्णय लेने में सक्षम हैं और उचित समय पर मंत्रालय का आवंटन करेंगे। फिलहाल अमित शाह के साथ एनसीपी नेताओं की बैठक के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे मिलेगी और पार्टी के भीतर आगे क्या रणनीति अपनाई जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। अब सबकी निगाहें मुंबई में होने वाली एनसीपी की बैठक और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले फैसले पर टिकी हैं।