नितिन नवीन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की ओर से आयोजित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता वहां तथ्यों के बजाय गलत जानकारी के आधार पर अपनी बात रख रहे थे। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष की राजनीति का आधार जनता के बीच भ्रम पैदा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि देश के विकास और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। अपने बयान में उन्होंने बिहार का विशेष रूप से उल्लेख किया। नितिन नवीन ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की शुरुआत बिहार से हुई थी और इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर जनता के सामने गलत तस्वीर पेश कर रहा है।
हालांकि, एसआईआर को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवाल और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी चिंताएं भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई हैं। बीजेपी अध्यक्ष ने भागलपुर की धरती से विपक्ष को संदेश देते हुए कहा कि देश की जनता अब राजनीतिक भ्रम के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जता रही है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की नीतियों और विकास कार्यों ने लोगों के बीच विश्वास का माहौल बनाया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे जनता के बीच जाकर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी पहुंचाएं।
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च को बीजेपी और एनडीए की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पदयात्रा के माध्यम से गठबंधन लोकतंत्र, राजनीतिक स्थिरता और केंद्र सरकार के प्रति अपने समर्थन को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। भागलपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने पर भी जोर रहा।बिहार की राजनीति में एसआईआर का मुद्दा पहले से ही चर्चा के केंद्र में है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है।
बीजेपी जहां इसे चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने की कवायद बता रही है, वहीं विपक्ष इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहा है। नितिन नवीन के ताजा बयान से साफ है कि बीजेपी आगामी राजनीतिक गतिविधियों में एसआईआर और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। भागलपुर में आयोजित पदयात्रा के जरिए पार्टी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास को अपनी राजनीतिक ताकत के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में सियासी बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।