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कैलाश यात्रा मार्ग पर विवाद: भारत ने नेपाल के दावे को नकारा

भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल के हालिया बयान पर साफ़ और सीधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लिपुलेख दर्रा कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पारंपरिक और स्थापित मार्ग रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस रास्ते से दशकों से यात्रा होती आ रही […]

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  • May 4, 2026 8:22 am IST, Published 3 hours ago

भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल के हालिया बयान पर साफ़ और सीधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लिपुलेख दर्रा कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पारंपरिक और स्थापित मार्ग रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस रास्ते से दशकों से यात्रा होती आ रही है, इसलिए इसे लेकर अचानक आपत्ति उठाना उचित नहीं है। भारत का यह बयान उस वक्त आया है जब नेपाल के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि लिपुलेख क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है और इस रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा नहीं होनी चाहिए। नेपाल ने इस संबंध में भारत और चीन दोनों को सूचित करने की बात भी कही थी।

भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि सीमावर्ती मुद्दों को एकतरफा और “बनावटी तरीके” से उठाना सही नहीं है। साथ ही भारत ने यह दोहराया कि वह नेपाल के साथ सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है। भारत का कहना है कि सीमा से जुड़े लंबित मामलों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जा सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-नेपाल संबंधों में सीमा विवाद को लेकर समय-समय पर तनाव देखने को मिलता रहा है, लेकिन दोनों देश संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात करते रहे हैं।

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