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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, मनोज अग्रवाल संभालेंगे कमान

पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Manoj Kumar Agarwal को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया। लोक भवन की ओर से जारी आदेश के बाद यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई। मनोज अग्रवाल फिलहाल […]

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  • May 11, 2026 8:53 pm IST, Published 1 day ago

पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री Shubhendu Adhikari ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Manoj Kumar Agarwal को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया। लोक भवन की ओर से जारी आदेश के बाद यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई। मनोज अग्रवाल फिलहाल पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यरत थे और हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों तथा विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की निगरानी कर चुके हैं।

1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल प्रशासनिक अनुभव और चुनावी प्रबंधन में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 3 अप्रैल 2025 को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद संभाला था। इससे पहले वे राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनकी पहचान एक शांत लेकिन सख्त प्रशासक के तौर पर होती रही है। राज्य सरकार ने उन्हें ऐसे समय मुख्य सचिव बनाया है, जब बंगाल में प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बदल रही हैं।

सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, अग्रवाल अब राज्य सरकार के सभी प्रमुख प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करेंगे। मुख्य सचिव राज्य की नौकरशाही का सबसे बड़ा पद माना जाता है और मुख्यमंत्री के बाद प्रशासनिक फैसलों में उसकी अहम भूमिका होती है। माना जा रहा है कि आगामी योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों को तेज गति से लागू करने के उद्देश्य से यह नियुक्ति की गई है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग में काम करने का अनुभव मनोज अग्रवाल को प्रशासनिक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाता है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मामलों को संभाला और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया। यही वजह है कि सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी बनाया है।

इस नियुक्ति के बाद राज्य की नौकरशाही में नए फेरबदल की भी चर्चा शुरू हो गई है। कई विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदले जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं विपक्ष भी इस फैसले पर नजर बनाए हुए है। हालांकि सरकार ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक फैसला बताया है।

मनोज अग्रवाल की नियुक्ति को मुख्यमंत्री के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक फैसलों में उनकी भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।

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