पश्चिम बंगाल में हुए चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान पुलिस को जो सबसे अहम सुराग मिले, उनमें टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज, दो संदिग्ध कारें और यूपीआई पेमेंट शामिल हैं। इन्हीं डिजिटल सुरागों की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। चंद्रनाथ रथ, पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के करीबी सहयोगी माने जाते थे। 6 मई की रात उत्तर 24 परगना जिले में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की। शुरुआती जांच में पुलिस को घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों से कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली।
सीसीटीवी फुटेज में एक सिल्वर रंग की कार और दूसरी गाड़ी लगातार रथ की एसयूवी के आसपास दिखाई दीं। पुलिस ने जब इन वाहनों की गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू किया तो पता चला कि दोनों कारें कई टोल प्लाजा से होकर गुजरी थीं। इसके बाद जांच का फोकस टोल प्लाजा के रिकॉर्ड पर केंद्रित किया गया। पुलिस टीम ने अलग-अलग टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और भुगतान संबंधी जानकारी जुटाई। इसी दौरान एक टोल प्लाजा पर यूपीआई के जरिए किया गया भुगतान जांच का सबसे बड़ा सुराग बन गया। पुलिस ने भुगतान से जुड़े मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स निकालीं। इसके आधार पर तकनीकी टीम ने संदिग्धों की लोकेशन ट्रैक करनी शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी वारदात के बाद लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके। हालांकि डिजिटल ट्रांजैक्शन और मोबाइल लोकेशन के जरिए पुलिस उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। कई दिनों तक चली निगरानी और छापेमारी के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल श्रीवास्तव, राज सिंह और मयंक मिश्रा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तीनों अलग-अलग राज्यों में छिपे हुए थे। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि पुलिस ने अभी हत्या के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा नहीं किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस वारदात में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि आज के दौर में अपराध करने के बाद बच निकलना आसान नहीं रह गया है। सड़क पर लगे कैमरे, टोल प्लाजा के डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम अपराधियों की हर गतिविधि को रिकॉर्ड कर लेते हैं। इस मामले में भी आरोपियों ने भागने के दौरान शायद यह नहीं सोचा था कि एक छोटा सा यूपीआई पेमेंट उन्हें पुलिस तक पहुंचा देगा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तकनीक की मदद से जांच पहले की तुलना में काफी तेज और सटीक हो गई है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और बैंक ट्रांजैक्शन जैसे डिजिटल सबूत अब अपराध जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं। चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में भी इन्हीं तकनीकी सबूतों ने पुलिस को बड़ी सफलता दिलाई। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और हत्या के पीछे की असली वजह जानने की कोशिश कर रही है। मामले में आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि डिजिटल युग में अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।