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एमएलए करनैल सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने एसीपी को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को रानी बाग थाने में एसीपी मंगोलपुरी मुरारी लाल से मुलाकात कर पीतमपुरा के शकूर बस्ती स्थित रामलीला ग्राउंड के पास हुई हालिया ढहाई की घटना को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय विधायक करनैल सिंह पर भड़काऊ बयान देने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप […]

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  • May 25, 2026 6:53 pm IST, Published 50 minutes ago

नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को रानी बाग थाने में एसीपी मंगोलपुरी मुरारी लाल से मुलाकात कर पीतमपुरा के शकूर बस्ती स्थित रामलीला ग्राउंड के पास हुई हालिया ढहाई की घटना को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय विधायक करनैल सिंह पर भड़काऊ बयान देने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इस दौरान संबंधित थाने के एसएचओ भी मौजूद रहे।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के परामर्श पर महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पुलिस को वीडियो रिकॉर्डिंग, मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट समेत कई दस्तावेजी साक्ष्य भी सौंपे।

ज्ञापन में कहा गया कि करनैल सिंह द्वारा यह दावा करना कि गिराया गया ढांचा मस्जिद या मदरसे का हिस्सा था, पूरी तरह निराधार और भ्रामक है। जमीयत ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक ने जानबूझकर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने और जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से इसे धार्मिक स्थल से जोड़कर पेश किया।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि विधायक ने कानून को अपने हाथ में लेकर न केवल ढहाई की कार्रवाई की, बल्कि लगातार भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले बयान भी दिए। इन बयानों और वीडियो को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। ज्ञापन के अनुसार, एक वीडियो में कथित तौर पर यह भी कहा गया कि इलाके में “न मदरसा चलने दिया जाएगा और न मस्जिद।”

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से इलाके में भय और सांप्रदायिक तनाव का माहौल बना है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। संगठन ने मांग की कि करनैल सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 153B, 295A, 505 सहित अन्य संबंधित धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि गिराए गए ढांचे की प्रकृति और स्वामित्व की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जाए तथा मस्जिद में आने वाले नमाजियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

जमीयत के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि संगठन लगातार दिल्ली पुलिस कमिश्नर और संबंधित डीसीपी के संपर्क में है, ताकि इलाके में सांप्रदायिक तनाव न बढ़े और कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके।

प्रतिनिधिमंडल में मौलाना आफताब आलम सिद्दीकी, मौलाना मुफ्ती खलील कासमी, कारी मोहम्मद आरिफ कासमी, हाफिज मोहम्मद यूसुफ अलआजमी, मुफ्ती जाकिर हुसैन कासमी, मौलाना जमशेद और डॉ. मोहम्मद यूसुफ समेत कई लोग शामिल थे। ज्ञापन की प्रतियां उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री दिल्ली को भी भेजी गई हैं।

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