नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर को जाममुक्त बनाने, आवागमन को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने और राजधानी को भविष्य के अनुरूप परिवहन नेटवर्क के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार मिलकर बड़े स्तर पर आधुनिक सड़क एवं संपर्क परियोजनाओं पर कार्य कर रही हैं। डबल इंजन की सरकार द्वारा नए एक्सप्रेसवे, सुरंग, एलिवेटेड कॉरिडोर और संपर्क मार्गों के माध्यम से दिल्ली-एनसीआर के परिवहन नेटवर्क को आधुनिक और निर्बाध बनाया जा रहा है। यह सभी योजनाएं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं।
हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ दिल्ली-एनसीआर की प्रमुख सड़क एवं संपर्क परियोजनाओं को लेकर बैठक आयोजिक की गई थी। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी थी कि दिल्ली को जाममुक्त बनाने, ट्रैफिक दबाव कम करने और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए कई नई एक्सप्रेसवे, सुरंग, एलिवेटेड कॉरिडोर और संपर्क मार्ग परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए नितिन गडकरी को धन्यवाद देते हुए उनका आभार व्यक्त किया था।
यूईआर-2 एक्सटेंशन से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (यूईआर-2) एक्सटेंशन से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत लगभग 17 किलोमीटर लंबे, 6-लेन और लगभग 3,500 करोड़ रुपये लागत वाले मार्ग का निर्माण किया जाएगा। यह कनेक्टिंग लिंक परियोजना ट्रोनिका सिटी के पास दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को यूईआर-2 से जोड़ेगी। इससे आईजीआई एयरपोर्ट, बारापुला नाला, मुकरबा चौक, सिंघु बॉर्डर और आश्रम-बदरपुर मार्ग पर यातायात दबाव कम होगा। साथ ही, द्वारका, रोहिणी, पंजाबी बाग और गुरुग्राम को देहरादून एक्सप्रेसवे तक सीधा संपर्क मिलेगा। परियोजना अभी अलाइनमेंट फाइनल करने के चरण में है और दिसंबर 2026 तक कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से नोएडा-फरीदाबाद कॉरिडोर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से नोएडा-फरीदाबाद संपर्क कॉरिडोर परियोजना के तहत लगभग 65 किलोमीटर लंबे, 6-लेन और 7,500 करोड़ रुपये लागत वाले मार्ग का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, डीएनडी, फरीदाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ेगी। इससे लोनी, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा और फरीदाबाद को तेज संपर्क सुविधा मिलेगी। इस परियोजना से कालिंदी कुंज, सराय काले खां और आउटर रिंग रोड पर यातायात दबाव कम होगा। साथ ही, अंतर-शहरी और मालवाहक यातायात के लिए वैकल्पिक नियंत्रित मार्ग उपलब्ध होगा। इस परियोजना पर भी दिसंबर 2026 तक कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
1500 करोड़ की लागत से बनेगा दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली-अमृतसर-कटरा संपर्क को यूईआर-2 से जोड़ने की परियोजना के तहत दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे से आने वाले यातायात को यूईआर-2 और द्वारका एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम और आईजीआई एयरपोर्ट तक सीधा संपर्क मिलेगा। यह परियोजना दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को यूईआर-2 पर लाने के लिए है। लगभग 17 किलोमीटर लंबे, 6-लेन और 1,500 करोड़ रुपये लागत वाले इस मार्ग से भारी वाहनों का बेहतर डायवर्जन होगा, दिल्ली-एनसीआर में जाम कम होगा और मालवाहक परिवहन अधिक सुचारु बनेगा। इस परियोजना का कार्य मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
यूईआर-2 सर्विस रोड से मिलेगा सुगम संपर्क
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अगली परियोजना मौजूदा यूईआर-2 के किनारे सर्विस रोड विकसित करने की परियोजना है। यह बाहरी दिल्ली में संपर्क सुविधा और नियोजित शहरी विस्तार को गति देगी। लगभग 26 किलोमीटर लंबी और 6,500 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना के तहत यूईआर-2 के दोनों ओर सेकेंडरी सर्विस रोड विकसित किए जाएंगे। 19 किलोमीटर लंबी दो-लेन सेकेंडरी सर्विस रोड के निर्माण के लिए 121 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। इससे स्थानीय लोगों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और रिहायशी क्षेत्रों को सुरक्षित एवं सुगम संपर्क सुविधा मिलेगी। सर्विस रोड बनने से मुख्य मार्ग पर जाम कम होगा और तेज गति वाले कॉरिडोर की क्षमता बेहतर होगी। इससे मुंडका औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स हब को विशेष लाभ मिलेगा।
शिव मूर्ति-नेल्सन मंडेला मार्ग सुरंग प्रोजेक्ट से घटेगा जाम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि शिव मूर्ति-नेल्सन मंडेला मार्ग सुरंग परियोजना दिल्ली की शहरी परिवहन व्यवस्था को नया आयाम देगी। लगभग 8 किलोमीटर लंबी, 6-लेन और 7,000 करोड़ रुपये लागत वाली यह भूमिगत सुरंग द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बिना सिग्नल संपर्क सुविधा प्रदान करेगी। इससे महिपालपुर, रंगपुरी और धौला कुआं क्षेत्रों में जाम कम होगा। साथ ही, एयरपोर्ट जाने वाले राव तुला राम मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा। इससे गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा। परियोजना को केंद्र सरकार की सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) की मंजूरी मिल चुकी है और मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद कार्य शुरू किया जाएगा।
एम्स-महिपालपुर-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 20 किलोमीटर लंबे, 6-लेन और 5,000 करोड़ रुपये लागत वाले एम्स-महिपालपुर-गुरुग्राम एलिवेटेड कॉरिडोर से दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यातायात दबाव कम होगा। इस परियोजना से एम्स, आईएनए, हौज खास, वसंत कुंज, महिपालपुर और गुरुग्राम के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी, जबकि धौला कुआं, महरौली-गुरुग्राम रोड और राव तुला राम मार्ग पर जाम घटेगा। इससे दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे पर ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ गुरुग्राम से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जाने वाले वाहनों को बेहतर डायवर्जन मिलेगा। एरोसिटी, रंगपुरी, छतरपुर और घिटोरनी की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। परियोजना पर अप्रैल 2027 तक काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कालिंदी कुंज इंटरचेंज से बेहतर होगा ट्रैफिक फ्लो
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओखला बैराज के पास कालिंदी कुंज इंटरचेंज परियोजना से दिल्ली-नोएडा-फरीदाबाद मार्ग पर ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा। करीब 500 मीटर लंबे, 6-लेन और 300 करोड़ रुपये लागत वाले इस प्रोजेक्ट में इंटरचेंज और फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) की व्यवहार्यता रिपोर्ट के आधार पर तैयार इस योजना से कालिंदी कुंज का जाम कम होगा और नोएडा, जसोला, सरिता विहार व फरीदाबाद के बीच सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही यात्रा समय, ईंधन खपत और वाहन प्रदूषण में भी कमी आएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। अक्टूबर 2026 तक कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य राजधानी को विश्वस्तरीय, हरित, टिकाऊ और निर्बाध परिवहन नेटवर्क के रूप में विकसित करना है ताकि लोगों को तेज, सुरक्षित, प्रदूषण मुक्त और आधुनिक परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।