नई दिल्ली: पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति के बाद केंद्र सरकार अब इथेनॉल ब्लेंडिंग को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सलाहकार तरुण कपूर ने संकेत दिया है कि सरकार इथेनॉल मिश्रण के स्तर को और बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी और आपूर्ति से जुड़े सभी पहलू अनुकूल रहे, तो देश फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को भी तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर होने वाला खर्च कम होगा और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के विस्तार से उपभोक्ताओं को भविष्य में विभिन्न प्रकार के ईंधनों के उपयोग का विकल्प मिल सकेगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।