पटना: बिहार के कई जिलों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जारी पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। पटना, छपरा, बेगूसराय, सीतामढ़ी समेत कई स्थानों पर पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए गिरफ्तार छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।
सीजेपी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर बिहार सरकार से अपील की कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को वापस लिया जाए। पार्टी ने कहा कि आंदोलन के बाद हुए संवाद और दिए गए आश्वासनों का सम्मान किया जाना चाहिए। पोस्ट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ अन्य नेताओं को भी टैग करते हुए यह आग्रह किया गया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के प्रति भरोसा कायम रखा जाए।
सीजेपी ने एक अन्य पोस्ट में देशभर की पुलिस से भी अपील की कि हाल ही में हुए समझौते की भावना का पालन किया जाए। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सीजेपी का दावा है कि बातचीत के दौरान यह सहमति बनी थी कि आंदोलन से जुड़े मामलों में छात्रों को राहत दी जाएगी और उनके खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार होगा।
Dear @samrat4bjp & @SuvenduWB,
Don’t break the assurance given by @JPNadda & @DrJitendraSingh. Drop all criminal cases put on the protestors.
— Cockroach Janta Party (@CJP_for_India) July 26, 2026
उधर, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं तथा उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि निर्दोष छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया, तो इसका राजनीतिक असर सरकार को भुगतना पड़ सकता है।
राजद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं और उनके परिवारों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
7 हत्याओं का आरोपी बिहार का मुख्यमंत्री सड़क छाप अपराधी है जिसने तमाम लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग देश में पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 से गोली चलवाई है।
छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हज़ारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है, परिजनों को…
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) July 27, 2026
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर विपक्ष इसे छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध से जोड़कर सरकार को घेर रहा है, तो दूसरी ओर प्रशासन कानून के दायरे में कार्रवाई की बात कह रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मामलों की समीक्षा करती है या पुलिस की कार्रवाई पहले की तरह जारी रहती है।
छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बिहार का यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार, विपक्ष और आंदोलनकारी संगठनों के रुख से इस विवाद की दिशा तय होगी।