नई दिल्ली: सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए जा रहे सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक को लेकर लोकसभा में राजनीतिक माहौल गरमा गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस से अपील करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में खुलकर चर्चा होनी चाहिए और हंगामे की बजाय सार्थक बहस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
लोकसभा की कार्यवाही से पहले मीडिया से बातचीत में किरेन रिजिजू ने कहा कि देशभर के लाखों छात्र लंबे समय से पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सरकार एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक सदन में पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून छात्रों का भरोसा मजबूत करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सदस्य इस विषय पर चर्चा से बच रहे हैं और सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उनके अनुसार, जब मुद्दा सीधे युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा हो, तब सभी दलों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद ही वह सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है जहां राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक चर्चा और समाधान निकलता है।
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से छात्रों के हित में लिए गए हालिया फैसलों को भी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। ऐसे में विपक्ष को भी रचनात्मक सहयोग देना चाहिए ताकि मजबूत कानून बनाकर भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे छात्रों की भावनाओं का सम्मान करें और विधेयक पर विस्तृत चर्चा में भाग लें। रिजिजू के मुताबिक, यदि सभी दल मिलकर इस कानून का समर्थन करते हैं तो इससे देश के करोड़ों छात्रों में विश्वास बढ़ेगा कि उनकी मेहनत और प्रतिभा का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से होगा।
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग उठाई। इसी पृष्ठभूमि में सरकार इस संशोधन विधेयक को महत्वपूर्ण बता रही है।
अब सभी की निगाहें लोकसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक पर चर्चा और आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के साथ बहस में भाग लेता है या राजनीतिक टकराव जारी रहता है।