इंफाल। मणिपुर में आगामी जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में संशोधन की मांग को लेकर माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें निर्वासित करने की मांग को लेकर हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर एक विशाल विरोध रैली निकाली। आंदोलनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एनआरसी में जरूरी संशोधन नहीं किए गए, तो राज्य में जनगणना का काम नहीं होने दिया जाएगा।
यह विशाल रैली कुल 14 प्रमुख नागरिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
रैली का मार्ग: यह मार्च इंफाल के टिड्डिम मैदान से शुरू हुआ और करीब 5 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए थाऊ मैदान पर जाकर समाप्त हुआ।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा पूरे रूट पर सुरक्षा के बेहद कड़े बंदोबस्त किए गए थे।
रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘मणिपुर की उपेक्षा न करें’ और ‘एनआरसी संशोधन नहीं तो जनगणना नहीं’ लिखे हुए बैनर और तख्तियां थीं। इस दौरान लोगों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आंदोलनकारियों के प्रवक्ता शांता नाहकपम ने केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“भाजपा ने असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के दौरान अवैध प्रवासियों के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। मणिपुर भी पिछले लंबे समय से अवैध प्रवासन और अंतरराष्ट्रीय सीमा की बाड़बंदी (Fencing) जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।”
“हमें ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार मणिपुर में एनआरसी लागू करने को लेकर गंभीर या इच्छुक नहीं है। हमारी स्पष्ट मांग है कि पहले एनआरसी में संशोधन किया जाए और उसके बाद ही राज्य में विधानसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) होना चाहिए।”
इस पूरे मामले और जनता के आक्रोश के बीच सरकार की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मार्च महीने में ही मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस विषय पर बयान देते हुए कहा था कि राज्य सरकार मणिपुर में पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष जनगणना सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य में जनगणना की प्रक्रिया को सुचारू रूप से शुरू करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।