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किसानों के लिए राहत जारी, FY27 में बढ़ सकता है फर्टिलाइजर सब्सिडी आवंटन

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में केंद्र सरकार का उर्वरक सब्सिडी पर खर्च शुरुआती बजट अनुमान की तुलना में काफी अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। विभिन्न आर्थिक आकलनों के अनुसार, किसानों को राहत देने और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को निर्धारित बजट से कहीं अधिक राशि खर्च […]

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  • June 9, 2026 5:09 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में केंद्र सरकार का उर्वरक सब्सिडी पर खर्च शुरुआती बजट अनुमान की तुलना में काफी अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। विभिन्न आर्थिक आकलनों के अनुसार, किसानों को राहत देने और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को निर्धारित बजट से कहीं अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल और उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आयात लागत तथा कृषि क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के कारण सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है। यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो उर्वरक सब्सिडी पर होने वाला खर्च बजट अनुमान के मुकाबले लगभग दोगुना तक पहुंच सकता है।

हालांकि, बढ़ते सब्सिडी व्यय के बावजूद सरकार को अतिरिक्त बाजार ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ने की संभावना है। वित्तीय प्रबंधन और राजस्व संग्रह में सुधार के चलते सरकार अपने निर्धारित उधारी कार्यक्रम के भीतर ही इस अतिरिक्त बोझ को संभालने की स्थिति में दिखाई दे रही है। इससे वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार के पास कर संग्रह, गैर-कर राजस्व और अन्य वित्तीय स्रोतों से पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, जिनके आधार पर अतिरिक्त सब्सिडी खर्च की भरपाई की जा सकेगी। यही कारण है कि फिलहाल वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित कर्ज लक्ष्य में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।

उर्वरक सब्सिडी भारतीय कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से किसानों को कम लागत पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलता है और खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है। सरकार की प्राथमिकता किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़ने देना है, इसलिए आवश्यक होने पर सब्सिडी मद में अतिरिक्त आवंटन किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की स्थिति और कृषि क्षेत्र की मांग के आधार पर सब्सिडी व्यय का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट होगा। फिलहाल संकेत यही हैं कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करते हुए वित्तीय संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

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