भारत सरकार देश में प्रदूषण और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए 100% इथेनॉल (E100) ईंधन को बढ़ावा दे रही है। पर्यावरण के लिहाज से यह एक बेहतरीन कदम है, लेकिन अगर सामान्य पेट्रोल गाड़ियों में सीधे 100% इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाए, तो गाड़ी के इंजन को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
आइए जानते हैं कि 100% इथेनॉल से सामान्य गाड़ियों को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं:
इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Energy Density) पेट्रोल के मुकाबले लगभग 34% कम होती है। इसका मतलब है कि समान मात्रा में पेट्रोल जितनी ताकत देता है, उतनी ताकत पैदा करने के लिए इंजन को ज्यादा इथेनॉल जलाना पड़ेगा।
100% इथेनॉल पर चलने से आपकी गाड़ी का माइलेज 30-35% तक कम हो जाएगा।
आपको पेट्रोल के मुकाबले बहुत जल्दी-जल्दी ईंधन भरवाने की जरूरत पड़ेगी।
इथेनॉल एक बेहतरीन सॉल्वेंट (Solvent/विलायक) है। सामान्य पेट्रोल गाड़ियों में ईंधन की पाइपें, सील, गैस्केट और फ्यूल टैंक प्लास्टिक या रबर के बने होते हैं।
100% इथेनॉल इन रबर और प्लास्टिक के हिस्सों को धीरे-धीरे गला देता है।
इससे फ्यूल लीक (ईंधन का रिसाव) होने का खतरा बढ़ जाता है और गाड़ी में आग भी लग सकती है।
इथेनॉल की प्रकृति ‘हाइग्रोस्कोपिक’ (Hygroscopic) होती है, यानी यह हवा में मौजूद नमी (पानी) को बहुत तेजी से सोखता है।
जब यह पानी सोख लेता है, तो ईंधन टैंक के नीचे पानी जमा होने लगता है (जिसे फेज़ सेपरेशन कहते हैं)।
इसके कारण गाड़ी के लोहे के फ्यूल टैंक और पाइपों में तेजी से जंग लगने लगती है।
इथेनॉल कम तापमान या सर्दियों के मौसम में पेट्रोल की तरह आसानी से भाप (Vaporize) नहीं बनता है।
सर्दियों के दिनों में या सुबह के समय गाड़ी को स्टार्ट करने में बहुत ज्यादा दिक्कत आएगी।
गाड़ी को बार-बार लंबा सेल्फ मारना पड़ेगा, जिससे बैटरी और सेल्फ मोटर पर दबाव बढ़ेगा।
पुरानी गाड़ियां (खासकर BS-4 या उससे पहले की कार्बोरेटर वाली गाड़ियां) इथेनॉल के लिए बिल्कुल नहीं बनी हैं। अगर उनमें E100 ईंधन डाला गया, तो फ्यूल इंजेक्टर्स और इंजन के अंदरूनी हिस्सों में कार्बन और कचरा जमा हो जाएगा, जिससे इंजन पूरी तरह जाम (Seize) हो सकता है।
महत्वपूर्ण बात (समाधान):
इन सभी नुकसानों से बचने के लिए कार कंपनियां अब फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) बना रही हैं। इन गाड़ियों के इंजन, फ्यूल लाइन्स और सेंसर खास तौर पर इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे 100% इथेनॉल को बिना किसी नुकसान के झेल सकें। इसलिए, जब तक आपके पास ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ गाड़ी न हो, तब तक अपनी सामान्य पेट्रोल गाड़ी में हाई-इथेनॉल ईंधन भूलकर भी न डलवाएं।