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शिमला में पहाड़ बना आफत, संजौली-ढली बाईपास पर भारी भूस्खलन से यातायात ठप

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार दोपहर प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला, जब संजौली-ढली बाईपास मार्ग पर अचानक भारी भूस्खलन हो गया। पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा, जिससे पूरे इलाके में धूल का विशाल गुबार छा गया और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते भारी चट्टानें, […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 18, 2026 10:42 pm IST, Published 2 hours ago

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गुरुवार दोपहर प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला, जब संजौली-ढली बाईपास मार्ग पर अचानक भारी भूस्खलन हो गया। पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा, जिससे पूरे इलाके में धूल का विशाल गुबार छा गया और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते भारी चट्टानें, मिट्टी और देवदार के पेड़ सड़क पर गिर पड़े, जिसके कारण यह महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।

घटना के दौरान सड़क पर कई वाहन मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक पहाड़ी से तेज आवाजें आने लगीं और कुछ ही क्षणों में मलबे का सैलाब सड़क की ओर बढ़ने लगा। स्थिति को भांपते हुए वाहन चालकों ने अपने वाहन रोक लिए और सुरक्षित स्थानों की ओर हट गए। लोगों की सतर्कता और प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया के चलते किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है, हालांकि घटना ने लोगों को दहशत में जरूर डाल दिया।

भूस्खलन के बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री घंटों तक जाम में फंसे रहे। सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने मार्ग पर वाहनों की आवाजाही तत्काल रोक दी।

अधिकारियों के अनुसार मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों और अन्य भारी उपकरणों की मदद से युद्धस्तर पर राहत एवं सफाई कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि पहाड़ी से अभी भी छोटे पत्थर गिरने की आशंका बनी हुई है, इसलिए सड़क को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने तक यातायात बहाल नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम, पहाड़ी ढलानों पर बढ़ते दबाव और वर्षा के कारण मिट्टी की पकड़ कमजोर होने से ऐसे भूस्खलनों की संभावना बढ़ जाती है। हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान इस प्रकार की घटनाएं आम हो जाती हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों के निकट होने वाली घटनाएं जनजीवन पर अधिक प्रभाव डालती हैं।

इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी राज्यों में सुरक्षित सड़क अवसंरचना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। राहत की बात यह रही कि समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। फिलहाल प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और मार्ग को जल्द से जल्द सामान्य करने के प्रयास जारी हैं।

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