रायपुर (छत्तीसगढ़) लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने जैन दर्शन और उसकी शिक्षाओं को वैश्विक शांति का आधार बताते हुए कहा है कि जैन मुनि और संत अपने महान सिद्धांतों के माध्यम से न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं। उन्होंने वर्तमान समय में समाज के सामने मौजूद तनाव, चिंता, संघर्ष और नैतिक मूल्यों के पतन जैसी चुनौतियों से निपटने में जैन धर्म की प्रासंगिकता पर विशेष बल दिया।
श्री बिरला गुरुवार को रायपुर में परम पूज्य आचार्य श्री विनय कुशल जी महाराज के भव्य आचार्य पदारोहण समारोह एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस गरिमामयी राष्ट्रीय उत्सव के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय मंत्री श्री तोखन साहू और सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ राजनेता और देश भर से आए गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
जैन दर्शन के मूल गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि आज का मानव भौतिक सुख-साधनों की अंधी दौड़ में शामिल है, लेकिन सच्ची खुशी केवल भौतिक संपदा से प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “आत्म-संयम, मन पर नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और नैतिक मूल्यों के पालन से ही मनुष्य को स्थायी संतुष्टि और परमानंद की प्राप्ति होती है।” श्री बिरला ने जोर देकर कहा कि भगवान महावीर की अहिंसा, करुणा और संयम से जुड़ी शिक्षाएं आज के इस अशांत युग में पहले से कहीं अधिक आवश्यक और प्रासंगिक हो चुकी हैं।
जैन संतों के दृढ़ अनुशासन की सराहना करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संत समाज का मार्गदर्शन करने और अपने अंतर्मन को मजबूत बनाने के लिए दीर्घ उपवास और कठोर आध्यात्मिक साधना करते हैं। इस दौरान उन्होंने गहन आध्यात्मिक अनुशासन के माध्यम से एक युवा बाल मुनि द्वारा सिद्धि प्राप्त करने कीRemarkable उपलब्धि का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि कम आयु में भी यदि एकाग्रता, ज्ञान और तपस्या का मार्ग अपनाया जाए, तो जीवन को पूरी तरह बदला जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में लोक सभा अध्यक्ष ने उपस्थित जनसमुदाय और देशवासियों से सत्य, नैतिकता, आत्म-अनुशासन और करुणा के इन शाश्वत मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पूज्य आचार्यों और मुनियों का यह निस्वार्थ त्याग और निस्वार्थ सेवा भाव आने वाली भावी पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा, जिससे एक मजबूत, सौहार्दपूर्ण और प्रबुद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव हो सकेगा।