कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान राज्य के कई हिस्सों से हिंसा और तनाव की खबरें सामने आई हैं। नादिया, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना सहित विभिन्न जिलों में झड़पों और तोड़फोड़ की घटनाओं ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है।
दक्षिण 24 परगना के बसंती इलाके में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विकास सरदार को निशाना बनाते हुए हमला किए जाने की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि जब वह एक मतदान केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे, तभी कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। इस दौरान उनकी गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमलावरों ने उम्मीदवार के सुरक्षाकर्मियों से हथियार छीनने की कोशिश भी की। यह घटना बूथ संख्या 76 के आसपास हुई बताई जा रही है। आरोप यह भी है कि मौके पर केंद्रीय बल मौजूद होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने में तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया गया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
हुगली-चुचुड़ा क्षेत्र में चुनावी पोस्टर और बैनर हटाने को लेकर विवाद बढ़ गया। कुछ जगहों पर मतदाता सूची को लेकर भी विवाद सामने आया, जहां बूथ संख्या 27, 28 और 29 पर कथित रूप से सूची फाड़े जाने की बात कही जा रही है। इस दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई।
वहीं, उत्तर 24 परगना के पानीहाटी क्षेत्र में भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प की खबर है। बूथ संख्या 145 पर हुई इस घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक विवाद चलता रहा, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम में खराबी के कारण मतदाताओं में नाराजगी देखने को मिली। बूथ संख्या 152, 153 और 154 पर स्थिति बिगड़ने के बाद सुरक्षा बलों ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को नियंत्रित किया। इस दौरान दो लोगों को हिरासत में लिया गया और क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
नादिया जिले के कुछ इलाकों में भी विवाद की स्थिति बनी रही। करीमपुर विधानसभा क्षेत्र में एक पुलिस अधिकारी पर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप लगा, जिससे वहां तनाव उत्पन्न हो गया। वहीं, छपरा क्षेत्र में एक राजनीतिक कार्यकर्ता पर हमले की घटना सामने आई, जिसमें उसे गंभीर चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कुल मिलाकर, दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई जगहों पर हिंसक घटनाएं सामने आने से प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।