चुनाव आयोग का नया नियम

नए वोटर्स को भी देना होगा माता-पिता के SIR का ब्योरा नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले नए आवेदकों के लिए एक नया नियम लागू किया है। अब ऑनलाइन फॉर्म-6 (Form-6) के जरिए पहली बार वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने वाले हर नए आवेदक को अपने माता-पिता […]

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  • July 13, 2026 5:31 am IST, Published 2 hours ago

नए वोटर्स को भी देना होगा माता-पिता के SIR का ब्योरा

नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले नए आवेदकों के लिए एक नया नियम लागू किया है। अब ऑनलाइन फॉर्म-6 (Form-6) के जरिए पहली बार वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने वाले हर नए आवेदक को अपने माता-पिता या पूर्वजों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का ब्योरा देना होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह नियम केवल पुराने मतदाताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि नए मतदाताओं पर भी पूरी तरह लागू होता है।

चुनाव आयोग ने क्यों उठाया यह कदम?

आयोग के अनुसार, इस नए प्रावधान से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  • नए मतदाताओं की पहचान और उनके पारिवारिक रिकॉर्ड का मिलान करना बेहद आसान हो जाएगा।

  • आवेदकों को सत्यापन के लिए कम दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे।

  • मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और विदेशी वोटर्स की पहचान कर उनके नाम हटाने में मदद मिलेगी।

ऑनलाइन फॉर्म-6 में नया घोषणा-पत्र अनिवार्य

  • पोर्टल पर तकनीकी बदलाव: चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म-6 भरते समय पार्ट ‘J’ और ‘K’ के बीच एक नया घोषणा-पत्र (Declaration Form) दिखाई देता है।

  • सबमिशन की बाध्यता: हालांकि इसे तकनीकी रूप से अनिवार्य मार्क नहीं किया गया है, लेकिन आवेदक इस घोषणा को भरे बिना अपना ऑनलाइन फॉर्म आगे सब्मिट नहीं कर सकते।

  • तीन विकल्प: इस घोषणा-पत्र में आवेदक को निम्नलिखित तीन में से किसी एक विकल्प को चुनना होता है:

    1. पिछली SIR मतदाता सूची में आवेदक का अपना नाम मौजूद था।

    2. माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR सूची में दर्ज था।

    3. न तो आवेदक और न ही उसके माता-पिता/पूर्वजों का नाम पिछली SIR सूची में था।

  • विवरण देना आवश्यक: यदि आवेदक पहले या दूसरे विकल्प को चुनता है, तो उसे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र (बूथ नंबर) और मतदाता सूची का क्रम संख्या (सीरियल नंबर) भी दर्ज करनी होगी। वहीं, ऑफलाइन (हार्ड कॉपी) फॉर्म-6 में यह नया हिस्सा शामिल नहीं है।

SIR प्रक्रिया और संयुक्त राष्ट्र के सवालों पर रुख

चुनाव आयोग ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्तेयर्स द्वारा SIR की पारदर्शिता पर उठाए गए सवालों को सिरे से खारिज किया है। आयोग का स्पष्ट करना है कि SIR पूरी तरह से संवैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सभी पात्र भारतीय नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्रों के नाम बाहर करना है। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी समुदाय के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है और नाम कटने की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को इसे चुनौती देने का पूरा अवसर दिया जाता है।

SIR के चरण

चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को अलग-अलग चरणों में लागू किया है:

  • पहला चरण: सबसे पहले बिहार में SIR लागू किया गया था, जिसकी अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) जारी की जा चुकी है।

  • दूसरा चरण: इसके बाद उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में दूसरे चरण का SIR अभियान चलाया गया।

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