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लोन महंगे नहीं होंगे, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार

रिजर्व बैंक ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया, मानसून और वैश्विक तनाव पर जताई चिंता मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आम जनता और कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25% […]

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  • June 5, 2026 10:40 am IST, Published 3 hours ago

रिजर्व बैंक ने GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया, मानसून और वैश्विक तनाव पर जताई चिंता

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आम जनता और कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि फिलहाल बैंकों के लोन महंगे नहीं होंगे और आम जनता की ईएमआई (EMI) में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून को तीन दिवसीय मैराथन बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौद्रिक नीति समिति के इन फैसलों की आधिकारिक जानकारी दी। इससे पहले साल 2025 में रिजर्व बैंक ने चार किस्तों में कुल 1.25% की बड़ी कटौती की थी, जिसके बाद आखिरी बार दिसंबर 2025 में दरें घटकर 5.25% पर आई थीं।

एमपीसी (MPC) बैठक के 5 बड़े फैसले और आर्थिक संकेत

1. आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान घटाया

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) में आ रही रुकावटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। इसके मद्देनजर आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है।

2. नीतिगत रुख (Policy Stance) ‘न्यूट्रल’ रखा

महंगाई के जोखिमों को भांपते हुए भी मौद्रिक नीति समिति ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। गवर्नर ने कहा कि कमेटी स्थिति पर बारीक नजर रख रही है और आगे आने वाले डेटा के आधार पर ही कोई अगला कदम उठाया जाएगा।

3. कमजोर मानसून और महंगाई की चिंता

आरबीआई ने देश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी (कम बारिश) को लेकर चिंता व्यक्त की है। गवर्नर मल्होत्रा के मुताबिक, कम बारिश का सीधा असर कृषि पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। इसके अलावा वैश्विक तनाव के कारण ईंधन (Fuel) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा महंगाई और आम जनता की जेब पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

4. मजबूत सर्विस सेक्टर और घरेलू मांग से राहत

आर्थिक मोर्चे पर राहत की बात यह है कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन अब भी शानदार बना हुआ है। जीएसटी रेशनलाइजेशन (GST Rationalisation) और स्थिर रोजगार के कारण शहरी क्षेत्रों में खपत (कंजम्पशन) को लगातार मजबूती मिल रही है।

क्या होता है रेपो रेट और आम जनता पर इसका असर?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक (RBI) अन्य कमर्शियल बैंकों को लोन देता है।

  • जब रेपो रेट घटता है: बैंकों को आरबीआई से सस्ता फंड मिलता है, जिससे वे अपने ग्राहकों के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें घटा देते हैं।

  • जब रेपो रेट स्थिर रहता है: जैसा कि इस बार हुआ है, बैंकों की कर्ज देने की लागत में कोई बदलाव नहीं होता, जिससे ग्राहकों की मौजूदा होम या कार लोन की EMI स्थिर बनी रहती है।

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