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E20 फेक कंटेंट पर नितिन गडकरी बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे, सोशल मीडिया पर कार्रवाई

मुंबईः केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके तथा उनके परिवार के संबंध में प्रसारित किए जा रहे कथित फर्जी, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। इस मामले में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने उन्हें सिविल मुकदमा […]

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  • July 27, 2026 4:23 pm IST, Published 29 seconds ago

मुंबईः केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके तथा उनके परिवार के संबंध में प्रसारित किए जा रहे कथित फर्जी, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। इस मामले में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने उन्हें सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके बाद अब इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जिनमें Meta सहित अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया जा सकता है।
मामले की जड़ उन पोस्ट, वीडियो और डिजिटल सामग्री को बताया जा रहा है, जिनमें यह दावा किया गया है कि केंद्र सरकार की E20 ईंधन नीति से नितिन गडकरी या उनके परिवार को किसी प्रकार का निजी लाभ पहुंचा है। गडकरी की ओर से इन दावों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है।

याचिका के अनुसार, इंटरनेट पर प्रसारित हो रही कुछ सामग्री में तथ्यों की पुष्टि किए बिना ऐसे आरोप लगाए गए हैं, जो आम लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं। गडकरी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस प्रकार की सामग्री तेजी से फैलती है और इससे किसी भी व्यक्ति की छवि पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए संबंधित सामग्री को हटाने और उसके प्रसार पर रोक लगाने के लिए न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक है।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित मुकदमे में Meta के अलावा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उन अज्ञात व्यक्तियों या संस्थाओं को भी पक्षकार बनाया जा सकता है, जिन्होंने कथित रूप से इस सामग्री को तैयार किया, साझा किया या व्यापक स्तर पर प्रसारित किया। यदि अदालत इस मामले में आगे निर्देश जारी करती है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म्स को विवादित पोस्ट हटाने, उनकी पहुंच सीमित करने या अन्य आवश्यक कदम उठाने पड़ सकते हैं।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में डीपफेक तकनीक और एआई आधारित फर्जी कंटेंट को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किए गए वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों की पहचान करना आम लोगों के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं और किसी व्यक्ति, संस्था या सार्वजनिक प्रतिनिधि की साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कोई सामग्री झूठी, मानहानिकारक या भ्रामक साबित होती है तो प्रभावित व्यक्ति अदालत से उसे हटाने, आगे प्रसार रोकने और आवश्यक होने पर क्षतिपूर्ति की मांग भी कर सकता है। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण मानी जाती है, खासकर तब जब उन्हें विवादित सामग्री की जानकारी मिलने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं की जाती।

E20 नीति को लेकर सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देना, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को मजबूत करना है। हालांकि इस नीति को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और आरोप सामने आते रहे हैं, जिनमें से कई की तथ्यात्मक पुष्टि नहीं हो पाई है।

अब इस मामले पर सबकी नजर बॉम्बे हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर रहेगी। अदालत में दायर होने वाले सिविल मुकदमे के बाद यह स्पष्ट होगा कि विवादित डिजिटल सामग्री को लेकर न्यायालय क्या निर्देश जारी करता है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही किस रूप में तय की जाती है। यह मामला डिजिटल युग में फेक कंटेंट, डीपफेक तकनीक और ऑनलाइन मानहानि से जुड़े कानूनी पहलुओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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